
भोपाल। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कल भोपाल में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की 44वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश के चिड़ियाघरों की प्रबंधन प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना, जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देना और चिड़ियाघरों में जानवरों के कल्याण से संबंधित नीतियों पर चर्चा करना था।
बैठक में देशभर के प्रमुख चिड़ियाघरों के प्रबंधन और संचालन से जुड़े अधिकारियों ने भाग लिया। केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि चिड़ियाघर केवल मनोरंजन का स्थान नहीं बल्कि शिक्षा और संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र हैं। उन्होंने चिड़ियाघरों में नवीनतम तकनीकों के उपयोग, जैविक प्रबंधन, स्वास्थ्य निगरानी और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह है कि चिड़ियाघर आधुनिक सुविधाओं से लैस हों और वे जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा के केंद्र बनें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक चिड़ियाघर में जानवरों के कल्याण की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और उनकी प्राकृतिक आदतों के अनुरूप जीवन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
बैठक में चिड़ियाघरों के लिए वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरण शिक्षा से संबंधित कई प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इसके अलावा, संरक्षण योग्य प्रजातियों के प्रजनन कार्यक्रम और देश-विदेश में अनुभव साझा करने के उपायों पर भी जोर दिया गया।
केंद्रीय मंत्री ने बैठक के अंत में अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे देश के चिड़ियाघरों को न केवल पर्यटन स्थल बल्कि शिक्षा और अनुसंधान का केंद्र बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि चिड़ियाघर हमारी जैव विविधता और पारिस्थितिकी के प्रति हमारी जिम्मेदारी को दर्शाते हैं और इन्हें संरक्षित करना हम सभी की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
इस 44वीं बैठक ने देशभर के चिड़ियाघरों के सुधार और संरक्षण के लिए नई दिशा और रणनीति तय की, जिससे भविष्य में जानवरों के कल्याण और पर्यावरण शिक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव आने की संभावना है।