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भारत बना वैश्विक मत्स्य और मांस उत्पादन में अग्रणी शक्ति

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। विशेष रूप से मत्स्य पालन और मांस उत्पादन के क्षेत्र में देश ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। हाल के आंकड़ों के अनुसार भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन चुका है, जो न केवल खाद्य सुरक्षा बल्कि रोजगार सृजन और निर्यात वृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मछली उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि

देश में मछली उत्पादन 9.58 मिलियन टन (एमटी) से बढ़कर 19.77 मिलियन टन (एमटी) तक पहुंच गया है। यह वृद्धि दर्शाती है कि मत्स्य पालन क्षेत्र में तकनीकी सुधार, आधुनिक पद्धतियों और सरकारी योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाती है।

मत्स्य क्षेत्र केवल उत्पादन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार के क्षेत्र में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है। देश में 30 मिलियन से अधिक लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग से जुड़े हुए हैं। तटीय क्षेत्रों से लेकर अंतर्देशीय जलाशयों तक, लाखों परिवारों की आजीविका इस क्षेत्र पर निर्भर है।

मांस उत्पादन में भी बड़ी छलांग

मछली उत्पादन के साथ-साथ भारत ने मांस उत्पादन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। उत्पादन 6.69 मिलियन टन से बढ़कर 10.50 मिलियन टन हो गया है। इस वृद्धि के साथ भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा मांस उत्पादक देश बन गया है। यह उपलब्धि पशुपालन, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में सुधारों का परिणाम है।

मांस उत्पादन में वृद्धि से निर्यात में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे देश को विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद मिली है। इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और छोटे किसानों व पशुपालकों की आय में सुधार हुआ है।

बजट 2026-27 में क्षेत्र को मिला प्रोत्साहन

आम बजट 2026-27 में सरकार ने मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए ₹2,761.80 करोड़ का प्रावधान किया है। इसके अतिरिक्त पशुपालन और डेयरी विभाग (एमओएएचएंडडी D) को ₹6,153.46 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि सरकार इस क्षेत्र को दीर्घकालिक विकास के लिए प्राथमिकता दे रही है।

यह निवेश अवसंरचना विकास, कोल्ड चेन नेटवर्क, प्रोसेसिंग यूनिट्स, आधुनिक उपकरणों और निर्यात क्षमताओं को मजबूत करने में सहायक होगा। इससे न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी बल्कि गुणवत्ता मानकों में भी सुधार आएगा।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

मत्स्य और मांस उत्पादन में यह प्रगति देश की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और युवाओं के लिए उद्यमिता के द्वार खुल रहे हैं।

आने वाले वर्षों में यदि इसी प्रकार निवेश, नवाचार और नीति समर्थन जारी रहा, तो भारत वैश्विक खाद्य उत्पादन क्षेत्र में और भी मजबूत स्थान हासिल कर सकता है। यह न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और ग्रामीण विकास के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।

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