
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भारत की राष्ट्रपति ने 8 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम द्वारा आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान करना और समाज में लैंगिक समानता तथा महिला सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि देश के वास्तविक और संतुलित विकास के लिए महिलाओं की बराबर भागीदारी बेहद जरूरी है, क्योंकि वे देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं शिक्षा, प्रशासन, न्यायपालिका, सेना, चिकित्सा, विज्ञान, तकनीक, कला और उद्यमिता जैसे कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं।
राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पंचायतों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, जिससे ग्रामीण विकास को नई दिशा मिल रही है। इसके साथ ही कई महिलाएं उद्योग, स्टार्टअप और कॉर्पोरेट जगत में नेतृत्व करते हुए देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही हैं। खेल के क्षेत्र में भी भारतीय महिलाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत तेजी से महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों को कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। स्कूली शिक्षा में अब लड़कियों और लड़कों के बीच लगभग समानता हासिल हो चुकी है। उच्च शिक्षा में भी छात्राओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
राष्ट्रपति ने बताया कि वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में एसटीईएम क्षेत्र में पढ़ाई कर रही छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक जिले में महिला छात्रावास स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे बेटियों को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आज महिलाएं केवल रोजगार पाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रोजगार देने वाली उद्यमी भी बन रही हैं। योजना के अंतर्गत सहायता प्राप्त कई स्टार्टअप में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी है। इसके अलावा सरकारी ई-मार्केटप्लेस पर बड़ी संख्या में महिला-स्वामित्व वाले लघु और मध्यम उद्यम सक्रिय हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि हाल ही में शुरू की गई ‘SHE-Mart’ पहल के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी। साथ ही श्रम संहिता का उद्देश्य कार्यस्थलों को महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित और समावेशी बनाना है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में कई प्रयासों के बावजूद समाज में अभी भी चुनौतियां मौजूद हैं। कई महिलाओं को आज भी भेदभाव, समान कार्य के लिए असमान वेतन और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान केवल कानून बनाने से संभव नहीं है, बल्कि समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव भी जरूरी है।
राष्ट्रपति ने कहा कि यदि देश को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है, तो महिलाओं की पूरी क्षमता को सामने लाना होगा। इसके लिए जरूरी है कि महिलाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया जाए और उन सपनों को साकार करने में हर स्तर पर उनका सहयोग किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब महिलाएं भय और भेदभाव से मुक्त वातावरण में आगे बढ़ेंगी, तभी वे राष्ट्र निर्माण में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकेंगी।
अंत में राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे हर लड़की को शिक्षा और समान अवसर देने, महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने तथा समाज में मौजूद हर प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने का संकल्प लें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस दिशा में सामूहिक प्रयास से भारत दुनिया के सामने महिला सशक्तिकरण का एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है।