
हाल ही में पश्चिम एशिया में बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। मीडिया ब्रीफिंग के दौरान Ministry of Petroleum and Natural Gas की संयुक्त सचिव Sujata Sharma ने बताया कि भारत पेट्रोल और डीजल के उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर है और इन ईंधनों के लिए देश को आयात पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में किसी भी प्रकार के तनाव या आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बावजूद भारत की ऊर्जा व्यवस्था मजबूत है और देश के पास अपने नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त क्षमता मौजूद है।
258 मिलियन टन की रिफाइनिंग क्षमता
मीडिया को संबोधित करते हुए सुजाता शर्मा ने बताया कि भारत के पास वर्तमान में लगभग 258 मिलियन टन प्रति वर्ष की रिफाइनिंग क्षमता है। यह क्षमता कच्चे तेल को विभिन्न पेट्रोलियम उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया को सक्षम बनाती है।
देश में मौजूद आधुनिक रिफाइनरियां कच्चे तेल को प्रोसेस करके पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन तैयार करती हैं। यही वजह है कि भारत अपने घरेलू बाजार की जरूरतों को बड़े स्तर पर स्वयं पूरा करने में सक्षम है।
पेट्रोल और डीजल के लिए आयात की आवश्यकता नहीं
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कच्चे तेल का आयात जरूर करता है, लेकिन उसे रिफाइन करने के बाद पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त उत्पादन देश के भीतर ही हो जाता है। इसलिए इन तैयार ईंधनों को विदेश से मंगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता इतनी व्यापक है कि कई बार घरेलू मांग पूरी करने के बाद अतिरिक्त पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी किया जाता है। इससे देश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी मदद मिलती है।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार आश्वस्त
पश्चिम एशिया की अस्थिर परिस्थितियों के बीच सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि भारत ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए विविध स्रोतों से कच्चे तेल की खरीद की रणनीति अपनाई है। इससे किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम होती है और आपूर्ति में बाधा आने की संभावना घटती है।
सरकार के अनुसार देश की रिफाइनिंग क्षमता, मजबूत वितरण प्रणाली और रणनीतिक ऊर्जा नीति के कारण भारत की ईंधन आपूर्ति स्थिर बनी हुई है।
भविष्य में क्षमता बढ़ाने की योजना
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। इससे न केवल घरेलू मांग को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा, बल्कि भारत वैश्विक पेट्रोलियम बाजार में एक महत्वपूर्ण निर्यातक के रूप में भी अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा।
कुल मिलाकर, सरकार के इस बयान से स्पष्ट होता है कि बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात के बावजूद भारत की ऊर्जा व्यवस्था मजबूत है और पेट्रोल व डीजल की उपलब्धता को लेकर फिलहाल किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है।