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इलाहाबाद उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण आदेश: क्षतिग्रस्त वाहन की मरम्मत और रंगाई की अनुमति

ने एक महत्वपूर्ण आदेश में वाहन स्वामी के अधिकारों से जुड़ा स्पष्ट निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा कि यदि किसी आपराधिक मामले में जब्त किया गया वाहन अदालत के आदेश से मालिक को सुपुर्द किया जाता है, तो उसे वाहन की आवश्यक मरम्मत और रंगाई कराने से रोका नहीं जा सकता, बशर्ते यह कार्य कानून के अनुरूप हो।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला अर्चित रस्तोगी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य का है। याचिकाकर्ता ने न्यायालय से शिकायत की कि फतेहपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 24 दिसंबर 2025 को आदेश देकर उनका वाहन सुपुर्द तो कर दिया, लेकिन कुछ शर्तें लगा दीं।

इन शर्तों में कहा गया था कि वाहन को अदालत में समय-समय पर प्रस्तुत करना होगा, उसे बेचा नहीं जा सकता और उसके रंग व स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

याचिकाकर्ता का कहना था कि वाहन दुर्घटना के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है और उसे सड़क पर चलाने योग्य बनाने के लिए मरम्मत तथा रंगाई आवश्यक है। इसलिए रंग बदलने या पेंट कराने पर लगी रोक व्यावहारिक रूप से अनुचित है।

याचिका में की गई मांग

याचिकाकर्ता ने के तहत उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश में संशोधन की मांग की।

उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि उन्हें कम जमानत या वैकल्पिक बांड स्वीकार कर वाहन को स्क्रैप या आवश्यक रूप से उपयोग योग्य बनाने की अनुमति दी जाए।

पक्षकारों की दलील

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वह अदालत द्वारा तय की गई अधिकांश शर्तों को मानने के लिए तैयार हैं, जैसे—

लेकिन वाहन की मरम्मत और रंगाई पर रोक व्यवहारिक नहीं है क्योंकि इससे वाहन की उपयोगिता प्रभावित होती है।

राज्य और अन्य पक्षकारों ने भी इस सीमित मांग पर कोई विशेष आपत्ति नहीं जताई।

न्यायालय का निर्णय

न्यायमूर्ति ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वाहन की मरम्मत और रंगाई कराना आवश्यक हो सकता है। इसलिए याचिकाकर्ता को यह अनुमति दी जाती है कि वह वाहन की मरम्मत और रंगाई करा सकता है, बशर्ते यह कार्य तथा उसके नियमों के अनुरूप हो।

हालांकि न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए अन्य शर्तों में कोई बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है।

आदेश का महत्व

यह आदेश कई मामलों में मार्गदर्शक हो सकता है, क्योंकि अक्सर जब्त या दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को अदालत से सुपुर्दगी मिलने के बाद मालिक मरम्मत कराने में कानूनी बाधाओं का सामना करते हैं।

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वाहन को सुरक्षित और उपयोग योग्य बनाने के लिए आवश्यक मरम्मत और रंगाई की अनुमति दी जा सकती है, यदि इससे न्यायिक प्रक्रिया या साक्ष्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

निष्कर्ष

इस निर्णय से यह सिद्ध होता है कि अदालतें व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए नागरिकों के अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करती हैं। वाहन मालिकों को भी यह समझना चाहिए कि अदालत द्वारा लगाई गई शर्तों का पालन करते हुए वे अपने वाहन की आवश्यक मरम्मत करा सकते हैं, बशर्ते वह कानून के दायरे में हो।

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