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पंजाब में अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा: सतलुज नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग-98 की पहल

भारत में जल परिवहन को सस्ता, पर्यावरण-अनुकूल और प्रभावी परिवहन माध्यम बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार नई परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसी दिशा में पंजाब और हिमाचल प्रदेश क्षेत्र में अंतर्देशीय जल परिवहन को विकसित करने के लिए सतलुज नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग-98 (एनडब्ल्यू-98) विकसित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

सतलुज नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग-98

सतलुज नदी के सुन्नी पुल (मंडी जिला, हिमाचल प्रदेश) से हरिके बैराज (पंजाब) तक के हिस्से को राष्ट्रीय जलमार्ग-98 घोषित किया गया है। यह जलमार्ग पंजाब के रूपनगर जिले से होकर भी गुजरता है। इस परियोजना का उद्देश्य नदी मार्ग के माध्यम से माल और अन्य गतिविधियों के लिए परिवहन के नए विकल्प तैयार करना है।

व्यवहार्यता अध्ययन जारी

इस जलमार्ग को विकसित करने के लिए विस्तृत परियोजना व्यवहार्यता अध्ययन (फीज़िबिलिटी स्टडी) किया जा रहा है। इस अध्ययन के लिए लगभग 2.82 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। उम्मीद है कि इस अध्ययन की रिपोर्ट मई 2026 तक तैयार हो जाएगी।

परियोजना व्यवहार्यता रिपोर्ट में जलमार्ग के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातों का आकलन किया जाएगा, जैसे—

इस अध्ययन के आधार पर यह तय किया जाएगा कि इस जलमार्ग को किस प्रकार विकसित किया जाए ताकि यह सुरक्षित और आर्थिक रूप से लाभकारी बन सके।

समुद्री भारत परिकल्पना 2030 से जुड़ा कदम

यह पहल केंद्र सरकार की समुद्री भारत परिकल्पना 2030 के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है। इस परिकल्पना का उद्देश्य देश में बंदरगाह, जलमार्ग और समुद्री परिवहन से जुड़ी आधारभूत संरचना को मजबूत करना है, ताकि व्यापार और परिवहन व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सके।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

यदि यह परियोजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है। जलमार्ग के विकास से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को परिवहन की सस्ती सुविधा मिल सकती है। साथ ही किसानों को भी अपने उत्पादों को बाजार तक कम लागत में पहुंचाने का नया माध्यम मिलेगा।

क्षेत्रीय विकास की संभावना

अंतर्देशीय जल परिवहन के विकास से न केवल परिवहन लागत कम होगी बल्कि इससे क्षेत्रीय विकास को भी गति मिल सकती है। नदी आधारित परिवहन पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत अधिक अनुकूल माना जाता है और इससे सड़क व रेल नेटवर्क पर दबाव भी कम किया जा सकता है।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी कि इस परियोजना की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार होने के बाद आगे के विकासात्मक कार्यों की दिशा तय की जाएगी।

निष्कर्ष

सतलुज नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग-98 के विकास की पहल पंजाब और हिमाचल प्रदेश क्षेत्र में अंतर्देशीय जल परिवहन को नई दिशा दे सकती है। यदि यह परियोजना सफल होती है, तो इससे परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ होने के साथ-साथ स्थानीय उद्योग, व्यापार और कृषि क्षेत्र को भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।

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