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खादी और ग्राम उद्योग को बढ़ावा: ग्रामोद्योग विकास योजना से लाखों कारीगरों को मिला सहारा

सांकेतिक तस्वीर

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और पारंपरिक कुटीर उद्योगों को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से खादी और ग्राम उद्योग आयोग (KVIC) विभिन्न योजनाओं के माध्यम से काम कर रहा है। इन्हीं पहलों में से एक महत्वपूर्ण पहल ग्रामोद्योग विकास योजना (GVY) है, जिसके जरिए देशभर में खादी और ग्राम उद्योग से जुड़े लाखों लोगों को रोजगार और आर्थिक सहयोग मिल रहा है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वावलंबन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

बुनकरों की मजदूरी में 20 प्रतिशत की वृद्धि

साल 2025 में खादी क्षेत्र के बुनकरों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया, जिसके तहत उनकी मजदूरी में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई। इस निर्णय से खादी उद्योग से जुड़े श्रमिकों को बड़ी राहत मिली है। मजदूरी बढ़ने से कारीगरों की आय में सुधार हुआ है और उन्हें अपने काम को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिला है। इससे खादी उत्पादन को भी सकारात्मक बढ़ावा मिला है।

43 लाख से अधिक कारीगरों को मिला लाभ

सरकारी जानकारी के अनुसार इस फैसले का लाभ 43 लाख से अधिक कतिनों और बुनकरों तक पहुंचा है। ये सभी लोग मुख्य रूप से गांवों और छोटे कस्बों में रहते हैं और खादी उत्पादन से ही अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। मजदूरी में वृद्धि से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उनके परिवारों के जीवन स्तर में भी सुधार देखने को मिला है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े

खादी और ग्राम उद्योग लंबे समय से ग्रामीण भारत में रोजगार का एक मजबूत आधार रहा है। ग्रामोद्योग विकास योजना के माध्यम से गांवों में छोटे-छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। इससे युवाओं को अपने ही क्षेत्र में काम मिलने लगा है और शहरों की ओर पलायन की प्रवृत्ति को कम करने में भी मदद मिल रही है।

कारीगरों को मिल रही आधुनिक सुविधाएं

इस योजना के तहत केवल मजदूरी बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, वित्तीय सहायता और बेहतर विपणन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे पारंपरिक खादी उद्योग को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने में मदद मिल रही है। साथ ही खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की मांग देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी लगातार बढ़ रही है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि खादी और ग्राम उद्योग को मजबूत करना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जब गांवों में ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय उद्योग विकसित होंगे, तब ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। ग्रामोद्योग विकास योजना इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर लागू की जा रही है, ताकि देश के लाखों कारीगरों को स्थायी आजीविका मिल सके और भारत की पारंपरिक विरासत भी सुरक्षित रह सके।

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