
Rajnath Singh ने भारत की खेल अर्थव्यवस्था को मजबूत और तेज़ी से विकसित करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को बढ़ाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर काम करें तो भारत में खेल उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में खेल प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी उपलब्ध कराने के लिए संसाधनों का विस्तार जरूरी है। उन्होंने इस दिशा में निजी कंपनियों, कॉरपोरेट समूहों और खेल संगठनों को आगे आने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह एक तेजी से बढ़ती हुई आर्थिक गतिविधि भी बन चुकी है। खेल से जुड़े उद्योगों में खेल उपकरण निर्माण, खेल प्रबंधन, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी, फिटनेस इंडस्ट्री और स्पोर्ट्स टूरिज्म जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
Ministry of Defence के प्रमुख के रूप में राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार पहले से ही खिलाड़ियों के लिए बुनियादी ढांचे के विकास और प्रशिक्षण सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि यदि इन प्रयासों में निजी क्षेत्र का सहयोग बढ़ेगा तो खेल क्षेत्र में निवेश भी बढ़ेगा और देश में विश्व स्तरीय खेल सुविधाएं विकसित हो सकेंगी।
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि खेलों के माध्यम से युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और टीमवर्क जैसी महत्वपूर्ण क्षमताएं विकसित होती हैं। इसलिए देश के विकास के लिए खेल संस्कृति को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों से भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक खेल मंच पर और अधिक मजबूत पहचान बनाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खेल क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो भारत की खेल अर्थव्यवस्था में तेज़ वृद्धि संभव है। इससे न केवल खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिलेंगे, बल्कि लाखों लोगों के लिए रोजगार और उद्यम के नए रास्ते भी खुलेंगे।