
नई दिल्ली, 16 मार्च 2026। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा (प्रधान) परीक्षा 2024 से संबंधित एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। यह सूचना प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) दिल्ली द्वारा जारी की गई, जिसमें आयोग ने आरक्षित सूची से एक और उम्मीदवार की सिफारिश करने की जानकारी दी है।
दरअसल, सिविल सेवा परीक्षा 2024 का अंतिम परिणाम 22 अप्रैल 2025 को घोषित किया गया था। उस समय आयोग ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय विदेश सेवा (IFS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) तथा अन्य केंद्रीय सेवाओं के समूह ‘क’ और समूह ‘ख’ में नियुक्ति के लिए कुल 1129 रिक्तियों के विरुद्ध 1009 उम्मीदवारों की अनुशंसा की थी।
आयोग ने परिणाम जारी करते समय यह भी स्पष्ट किया था कि सिविल सेवा परीक्षा नियमावली के नियम 20(4) और 20(5) के अनुसार अंतिम रूप से अनुशंसित उम्मीदवारों के नीचे एक समेकित आरक्षित सूची (Reserve List) भी तैयार की गई है। इस आरक्षित सूची का उपयोग भविष्य में रिक्त पदों को भरने के लिए किया जाता है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के अनुरोध पर आयोग ने पहले 28 अक्टूबर 2025 को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए आरक्षित सूची से 114 उम्मीदवारों की सिफारिश की थी। इस सूची में विभिन्न श्रेणियों के उम्मीदवार शामिल थे, जिनमें सामान्य वर्ग के 94, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के 5, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 13, अनुसूचित जाति (SC) के 1 तथा अनुसूचित जनजाति (ST) के 1 उम्मीदवार शामिल थे।
अब एक बार फिर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अनुरोध पर संघ लोक सेवा आयोग ने आरक्षित सूची के शेष पद को भरने के लिए सामान्य वर्ग के 1 उम्मीदवार की सिफारिश की है। यह सिफारिश सिविल सेवा परीक्षा 2024 के आधार पर की गई है।
आयोग द्वारा जारी सूचना के अनुसार आरक्षित सूची से चयनित उम्मीदवार का विवरण इस प्रकार है:
क्रम संख्या: 1
रोल नंबर: 6206417
उम्मीदवार का नाम: वीरगन्धम लक्ष्मी सुजिता
आयोग ने बताया है कि इस उम्मीदवार को नियुक्ति से संबंधित आगे की जानकारी कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा सीधे ही प्रदान की जाएगी।
इस प्रकार सिविल सेवा परीक्षा 2024 की आरक्षित सूची से रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। यह कदम उन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है जो अंतिम चयन सूची के बाद आरक्षित सूची में शामिल किए गए थे।
सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इसके माध्यम से भारत की शीर्ष प्रशासनिक सेवाओं में अधिकारियों का चयन किया जाता है, जो देश के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।