
भारतीय रेल की नई सुरक्षा पहल
- कुल फेंसिंग लंबाई: 16,398 किलोमीटर
- मुख्य उद्देश्य: ट्रैक पर अवैध प्रवेश रोकना, दुर्घटनाओं को कम करना और तेज गति वाली ट्रेनों के संचालन को सुरक्षित बनाना।
- प्रमुख कॉरिडोर: लोनावाला–पुणे–दौंड मार्ग पर कार्य जारी, जिसमें 150 किलोमीटर फेंसिंग पहले ही पूरी हो चुकी है।
- सबसे अधिक कवरेज वाले ज़ोन:
- उत्तर मध्य रेलवे – 2,721 किमी
- दक्षिण मध्य रेलवे – 2,326 किमी
- पश्चिम रेलवे – 2,257 किमी
क्यों ज़रूरी है यह फेंसिंग?
- ट्रैक पर अवैध प्रवेश: भारत में कई जगह लोग शॉर्टकट के लिए रेलवे ट्रैक का उपयोग करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है।
- तेज़ गति वाली ट्रेनें: 110 किमी/घंटा से अधिक स्पीड वाली ट्रेनों के लिए फेंसिंग सुरक्षा का अहम हिस्सा है।
- वन्यजीव संरक्षण: कुछ क्षेत्रों में फेंसिंग का उद्देश्य हाथियों और अन्य जानवरों को ट्रैक पर आने से रोकना भी है ।
यात्रियों की प्रतिक्रिया
हालांकि यह पहल सुरक्षा के लिहाज़ से सराहनीय है, लेकिन यात्रियों की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
- समयपालन की समस्या: हावड़ा–भुवनेश्वर मार्ग पर कई यात्री ट्रेनों की पंक्चुअलिटी 0% बताई जा रही है, केवल वंदे भारत और शताब्दी समय पर चल रही हैं।
- विशेष ट्रेनें प्रभावित: ट्रेन संख्या 12073 और 12822 के लगातार लेट होने की शिकायतें दर्ज की गई हैं।
भविष्य की दिशा
- लक्ष्य: भारतीय रेल का उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में सभी प्रमुख कॉरिडोर पर फेंसिंग पूरी की जाए।
- ट्रैक अपग्रेड: FY27 तक 7,900 किमी ट्रैक रिन्यूअल का लक्ष्य भी रखा गया है, जिससे तेज़ और सुरक्षित ट्रेन संचालन संभव होगा ।
- यात्रियों की अपेक्षा: सुरक्षा के साथ-साथ समयपालन और सेवा गुणवत्ता में सुधार की भी मांग बढ़ रही है।
निष्कर्ष
भारतीय रेल की फेंसिंग पहल यात्रियों और ट्रेनों की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम है, लेकिन साथ ही समयपालन और सेवा सुधार पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। सुरक्षा और सुविधा दोनों का संतुलन ही भारतीय रेल को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में आगे ले जाएगा।