
उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सतर्कता एजेंसियों द्वारा लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में हाल ही में दो अलग-अलग जनपदों में की गई कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शासन-प्रशासन भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
जनपद मेरठ में यूपी पूर्व सैनिक कल्याण निगम के एक लेखा लिपिक को ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। आरोपी पर आरोप था कि वह अपने पद का दुरुपयोग करते हुए संबंधित कार्य को करने के बदले में अवैध धनराशि की मांग कर रहा था। शिकायत मिलने के बाद सतर्कता टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और आरोपी को रिश्वत लेते समय पकड़ लिया।
इसी प्रकार, जनपद अम्बेडकरनगर में जल निगम के एक पम्प ऑपरेटर को ₹5,000 की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया गया। बताया गया कि वह आम नागरिक के कार्य को पूरा करने के एवज में धन की मांग कर रहा था। पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए टीम ने मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया।
इन दोनों घटनाओं से यह साफ संकेत मिलता है कि राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर कार्य कर रही हैं। आम जनता से भी अपील की जा रही है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी उनसे किसी प्रकार की अवैध धनराशि की मांग करता है, तो वे तुरंत इसकी सूचना संबंधित विभाग या सतर्कता इकाई को दें।
भ्रष्टाचार के खिलाफ इस प्रकार की त्वरित और प्रभावी कार्रवाइयां न केवल व्यवस्था में पारदर्शिता को बढ़ावा देती हैं, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी मजबूत करती हैं। आने वाले समय में भी इस तरह की कार्रवाइयों से एक स्वच्छ, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने में मदद मिलेगी।