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उपराष्ट्रपति द्वारा मॉडर्न स्कूल के स्वर्ण जयंती भवन का लोकार्पण: शिक्षा से सशक्त भारत की ओर एक कदम

भारत के उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली के वसंत विहार स्थित मॉडर्न स्कूल में निर्मित स्वर्ण जयंती भवन का लोकार्पण किया। यह आयोजन केवल एक नई इमारत के उद्घाटन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह संस्थान की 50 वर्षों की गौरवपूर्ण शैक्षिक यात्रा का उत्सव और शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के संकल्प का प्रतीक भी बना।

सांकेतिक तस्वीर

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने मॉडर्न स्कूल की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि इस संस्थान ने शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि विद्यालय ने छात्रों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का विकास कर उन्हें समाज का जिम्मेदार नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

बचपन की शिक्षा: जीवन की मजबूत आधारशिला

उपराष्ट्रपति ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा किसी भी व्यक्ति के जीवन की दिशा तय करती है। बचपन में प्राप्त ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन व्यक्ति के व्यक्तित्व को गढ़ते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि बच्चों को सही शिक्षा और सकारात्मक वातावरण मिले, तो वे भविष्य में समाज और देश के लिए उपयोगी साबित होते हैं। उनके अनुसार, एक सशक्त राष्ट्र की नींव अच्छे नागरिकों पर टिकी होती है।

शिक्षक: समाज के असली निर्माता

उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों के जीवन के मार्गदर्शक होते हैं। शिक्षक ही छात्रों के आत्मविश्वास, सोच और चरित्र का निर्माण करते हैं। उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी संस्था की सफलता उसके शिक्षकों की निष्ठा और प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है।

सामूहिक प्रयासों की सराहना

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने स्वर्ण जयंती भवन के निर्माण में पूर्व छात्रों और समाज के सहयोग को विशेष रूप से सराहा। उन्होंने कहा कि जब समाज के विभिन्न वर्ग एक साथ मिलकर किसी कार्य को आगे बढ़ाते हैं, तो वह प्रयास और भी प्रभावशाली बन जाता है। कॉर्पोरेट क्षेत्र के सहयोग को उन्होंने सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

विकसित भारत का विज़न

उपराष्ट्रपति ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह लक्ष्य तभी संभव है जब विकास समावेशी और संतुलित हो। उन्होंने कहा कि देश के हर क्षेत्र और हर वर्ग को विकास की प्रक्रिया में समान अवसर मिलना चाहिए। उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में हो रहे तेजी से विकास को उन्होंने इस दिशा में सकारात्मक कदम बताया।

शिक्षा: भविष्य की दिशा

अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने कहा कि मॉडर्न स्कूल जैसे संस्थान देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रहे हैं। शिक्षा ही वह माध्यम है, जो भारत को आत्मनिर्भर, सक्षम और वैश्विक स्तर पर अग्रणी बना सकती है।

यह कार्यक्रम इस बात का सशक्त संदेश देता है कि शिक्षा, सहयोग और समर्पण के माध्यम से ही एक मजबूत और विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है। मॉडर्न स्कूल का स्वर्ण जयंती भवन न केवल एक आधुनिक संरचना है, बल्कि यह उत्कृष्ट शिक्षा, सामूहिक प्रयास और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदों का प्रतीक भी है।

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