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एनएएफईडी निविदा विवाद पर न्यायालय का अहम फैसला: याचिकाएं खारिज, शर्तें वैध घोषित

न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में एनएएफईडी द्वारा जारी निविदा को चुनौती देने वाली तीनों रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया। यह मामला उत्तर प्रदेश में एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत पूरक पोषण (THR) की आपूर्ति से जुड़ा हुआ था, जिसकी अनुमानित लागत लगभग ₹2,768 करोड़ थी।

क्या था पूरा विवाद?

एनएएफईडी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश में पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों की आपूर्ति हेतु एक निविदा जारी की थी। इस निविदा में कुछ विशेष पात्रता शर्तें रखी गई थीं, जिनमें प्रमुख थीं—

इन शर्तों को याचिकाकर्ताओं ने मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी।

याचिकाकर्ताओं के प्रमुख तर्क

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि—

प्रतिवादियों (एनएएफईडी और राज्य) का पक्ष

एनएएफईडी और राज्य सरकार ने इन शर्तों को उचित ठहराते हुए कहा—

न्यायालय का विश्लेषण

न्यायालय ने विस्तार से दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार करते हुए कहा—

सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का हवाला

अदालत ने कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए दोहराया कि—

अंतिम निर्णय

सभी तथ्यों और कानूनी सिद्धांतों के आधार पर न्यायालय ने कहा—

👉 निविदा की शर्तें उचित, तार्किक और सार्वजनिक हित में हैं।
👉 याचिकाओं में कोई दम नहीं है।
👉 तीनों रिट याचिकाएं खारिज की जाती हैं।

साथ ही, लंबित सभी आवेदन भी निरस्त कर दिए गए।


निष्कर्ष

यह निर्णय सार्वजनिक खरीद (Public Procurement) में सरकार के अधिकार और न्यायिक सीमाओं को स्पष्ट करता है। अदालत ने यह संदेश दिया कि—

✔️ प्रतिस्पर्धा जरूरी है, लेकिन गुणवत्ता और समयबद्धता उससे भी अधिक महत्वपूर्ण हैं।
✔️ नीतिगत फैसलों में न्यायालय केवल सीमित हस्तक्षेप करेगा।
✔️ जनहित से जुड़े मामलों में व्यावहारिकता को प्राथमिकता दी जाएगी।

यह फैसला भविष्य की निविदाओं और सरकारी खरीद प्रक्रियाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक के रूप में देखा जा रहा है।

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