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भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026: ऊर्जा सुरक्षा और सुधारों पर केंद्र-राज्य का साझा संकल्प

भारत के ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित के दूसरे दिन एक महत्वपूर्ण मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत मंत्री ने की, जबकि सह-अध्यक्षता राज्य मंत्री ने निभाई। इस उच्चस्तरीय बैठक में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ऊर्जा मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और नीति-निर्माता शामिल हुए।

सांकेतिक तस्वीर

ऊर्जा क्षेत्र: विकास की रीढ़

बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि विद्युत क्षेत्र देश के आर्थिक विकास और आधारभूत ढांचे की नींव है। उन्होंने बताया कि भारत की स्थापित विद्युत क्षमता 520 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है, जो देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। साथ ही, स्मार्ट मीटरिंग, बेहतर वितरण व्यवस्था और डिस्कॉम्स के प्रदर्शन में सुधार जैसे कदमों ने उपभोक्ता सेवाओं को मजबूत किया है।

ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष जोर

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना है कि किफायती, कुशल और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन, पारेषण और वितरण—तीनों स्तरों पर सुधार जरूरी हैं।

इसके साथ ही उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने, प्रति व्यक्ति बिजली खपत बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों—विशेष रूप से परमाणु ऊर्जा—के उपयोग को विस्तार देने की बात कही।

तकनीक और एआई का बढ़ता प्रभाव

राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने अपने संबोधन में विद्युत क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने स्मार्ट मीटरिंग को डिजिटल परिवर्तन का प्रमुख उदाहरण बताते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की कुल स्थापित क्षमता का लगभग आधा हिस्सा अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आ रहा है।

नई राष्ट्रीय विद्युत नीति की दिशा

बैठक में “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए नई राष्ट्रीय विद्युत नीति के मसौदे पर भी चर्चा हुई। यह नीति ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सुधारों और सतत विकास के लिए मार्गदर्शक साबित होगी।

डिस्कॉम्स की रेटिंग और रैंकिंग रिपोर्ट जारी

इस अवसर पर विद्युत मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए दो महत्वपूर्ण रिपोर्टें जारी कीं:

1. उपभोक्ता सेवा रेटिंग (CSRD)

यह रिपोर्ट बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) के उपभोक्ता सेवा स्तर का मूल्यांकन करती है। इसमें मीटरिंग, बिलिंग की सटीकता, शिकायत निवारण की गति और पारदर्शी टैरिफ जैसी सेवाओं को आधार बनाया गया है।
66 डिस्कॉम्स के मूल्यांकन में:

यह सुधार दर्शाता है कि देश में उपभोक्ता सेवाओं की गुणवत्ता लगातार बेहतर हो रही है।

2. वितरण उपयोगिता रैंकिंग (DUR)

डीयूआर रिपोर्ट डिस्कॉम्स के समग्र प्रदर्शन का बहुआयामी आकलन प्रस्तुत करती है। इसमें वित्तीय स्थिति, परिचालन दक्षता, संस्थागत क्षमता और सेवा गुणवत्ता जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य एक मजबूत, टिकाऊ और उपभोक्ता-केंद्रित बिजली वितरण प्रणाली विकसित करना है।

निष्कर्ष

यह बैठक केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के ऊर्जा भविष्य की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग, तकनीकी नवाचार और नीति सुधारों के जरिए भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा मॉडल भी प्रस्तुत कर रहा है।

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