उत्तर प्रदेश के जनपद बहराइच के कतर्निया घाट वन क्षेत्र एक अत्यंत दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है। अभयारण्य के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत भवानीपुर गांव में एक 80 वर्षीय वृद्ध महिला की जंगली हाथी के हमले में मौत हो गई। इस घटना ने न केवल स्थानीय ग्रामीणों को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को भी उजागर किया है।

📍 घटना का विवरण
भवानीपुर गांव की निवासी कुवारिया (80 वर्ष), पत्नी इतवारी, रविवार सुबह लगभग 10:30 बजे अपने घर से खेत की ओर बकरियां चराने के लिए निकली थीं। उनका खेत जंगल से सटा हुआ है, जो अक्सर जंगली जानवरों की आवाजाही का मार्ग बन जाता है।
इसी दौरान एक टस्कर (नर हाथी) अचानक वहां आ गया और महिला को देखकर आक्रामक हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथी ने महिला को दौड़ा लिया और पकड़कर पैरों तले रौंद दिया। हमले के दौरान हाथी ने अपने दांतों से भी वार किया, जिससे महिला के चेहरे और सीने में गंभीर चोटें आईं। इस भीषण हमले के कारण महिला की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
😢 गांव में मचा कोहराम
घटना की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। लोगों ने सामूहिक रूप से हाका लगाकर (शोर मचाकर) हाथी को जंगल की ओर भगाया। इसके बाद खेत के पास महिला का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। शव की हालत देखकर गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
🚓 प्रशासन और वन विभाग की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। वन दरोगा राधेश्याम, वन रक्षक संतोष कुमार और वाचर सुनील गौड़ ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। वहीं स्थानीय पुलिस टीम, जिसमें थानाध्यक्ष प्रकाश चंद्र शर्मा और चौकी इंचार्ज मंजेश कुमार शामिल थे, ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
वन विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू किए जाने की संभावना है।
⚠️ बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष
कतर्नियाघाट क्षेत्र में इस प्रकार की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोग अक्सर जंगली जानवरों के खतरे के बीच जीवन यापन करते हैं। खासकर हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जंगल और गांव के बीच सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कब किए जाएंगे। वन विभाग को चाहिए कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाए, चेतावनी तंत्र विकसित करे और ग्रामीणों को सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाए।
🧭 निष्कर्ष
भवानीपुर गांव की यह घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है। एक निर्दोष वृद्ध महिला की इस तरह मौत होना न केवल परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है।
जरूरत है कि प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय समुदाय मिलकर ऐसे उपाय करें, जिससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव को कम किया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।