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भारत के हरित भविष्य को नई रफ्तार: जीएसटी सुधारों से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती

भारत तेजी से एक ऐसे विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जहां आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलते हैं। इसी दिशा में हाल ही में वस्तु एवं सेवा कर (GST) में किए गए महत्वपूर्ण बदलाव देश के हरित परिवर्तन को गति देने वाले साबित हो रहे हैं। की पहल के तहत अपशिष्ट प्रबंधन, जैव-अपघटनीय उत्पादों और हरित परिवहन से जुड़े क्षेत्रों को सस्ता और अधिक सुलभ बनाया गया है।

के नेतृत्व में यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ और ‘लाइफ (Lifestyle for Environment)’ जैसे अभियानों के अनुरूप है, जो भारत को वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर अग्रसर करती है।


♻️ अपशिष्ट प्रबंधन को मिला प्रोत्साहन

अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP) सेवाओं पर जीएसटी दर को 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे:


🌱 प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ सशक्त कदम

एकल-उपयोग प्लास्टिक के विकल्प को बढ़ावा देने के लिए बायो-डिग्रेडेबल बैग पर जीएसटी को 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे:


🚌 हरित परिवहन की ओर बड़ा कदम

परिवहन क्षेत्र में सुधार करते हुए बसों और मालवाहक वाहनों पर जीएसटी को 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है। इसके प्रमुख लाभ:


🌍 एक स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की ओर

जीएसटी में यह विवेकीकरण केवल कर सुधार नहीं, बल्कि एक व्यापक पर्यावरणीय रणनीति का हिस्सा है। इससे न केवल उद्योगों को आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

इन कदमों के माध्यम से भारत वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से लड़ने में अपनी भूमिका को और सशक्त बना रहा है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

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