बाबागंज में भाजपा की जिला कार्यकारिणी को लेकर बगावत, कार्यकर्ताओं ने खोला मोर्चा

प्रतापगढ़ जनपद के बाबागंज विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी () की हाल ही में घोषित जिला कार्यकारिणी सूची ने संगठन के भीतर गहरे असंतोष को जन्म दे दिया है। बाबागंज क्षेत्र को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने के आरोपों ने कार्यकर्ताओं के बीच आक्रोश की लहर पैदा कर दी है, जो अब खुलकर सामने आने लगी है।
प्रतिनिधित्व न मिलने से बढ़ी नाराजगी
स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि बाबागंज जैसे महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र को जिला कार्यकारिणी में कोई स्थान नहीं दिया गया, जबकि नजदीकी कुंडा क्षेत्र के सीमित दायरे में कई नेताओं को महत्वपूर्ण पदों से नवाजा गया। इससे यह संदेश गया है कि चयन प्रक्रिया में क्षेत्रीय संतुलन और संगठनात्मक न्याय का ध्यान नहीं रखा गया।
कार्यकर्ताओं के अनुसार, जिला स्तर पर प्रतिनिधित्व की अनदेखी न केवल स्थानीय नेतृत्व को कमजोर करती है, बल्कि जमीनी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी सीधा असर डालती है। उनका मानना है कि वर्षों से संगठन के लिए कार्य कर रहे लोगों की उपेक्षा से पार्टी की पकड़ कमजोर हो सकती है।
चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल
भैसाना गांव में आयोजित हीरागंज मंडल की बैठक में कार्यकर्ताओं ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई। बैठक में कई पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा और “जुगाड़” तथा पक्षपात के आधार पर पदों का वितरण किया गया।
कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि वरिष्ठता और सक्रियता के बजाय व्यक्तिगत समीकरणों को प्राथमिकता दी गई। इससे संगठन में काम करने वाले युवा और सक्रिय कार्यकर्ता खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं।
संगठन और सरकार दोनों से दूरी का एहसास
बैठक में मौजूद कार्यकर्ताओं ने अपनी स्थिति को “सांप-छछुंदर” जैसी बताते हुए कहा कि न तो संगठन में उनकी सुनवाई हो रही है और न ही सरकार में उनकी समस्याओं पर ध्यान दिया जा रहा है। उनका कहना है कि पहले से ही कुछ सामाजिक मुद्दों को लेकर असंतोष था, और अब संगठनात्मक उपेक्षा ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
चुनावी असर की चेतावनी
नाराज कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेतृत्व को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जिला कार्यकारिणी सूची पर पुनर्विचार नहीं किया गया और बाबागंज क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला, तो इसका असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है।
स्थानीय नेताओं का मानना है कि संगठन की मजबूती के लिए सभी क्षेत्रों को समान महत्व देना आवश्यक है। यदि समय रहते असंतोष को दूर नहीं किया गया, तो यह पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है।
नेतृत्व के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल, बाबागंज के कार्यकर्ता पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संगठन इस असंतोष को किस तरह संभालता है और क्या कार्यकारिणी में बदलाव या संतुलन स्थापित करने के लिए कोई कदम उठाए जाते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि संगठन के भीतर संतुलन, पारदर्शिता और कार्यकर्ताओं की भागीदारी किसी भी राजनीतिक दल की मजबूती के लिए बेहद जरूरी होती है।