
भारत में शिक्षा को अधिक समावेशी, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा समग्र शिक्षा अभियान (Samagra Shiksha) को लागू किया गया है। यह योजना स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों—प्राथमिक से लेकर माध्यमिक और उच्च माध्यमिक तक—को एकीकृत रूप में मजबूत करने का प्रयास करती है। हाल ही में राज्यसभा में इस विषय पर चर्चा के दौरान सरकार ने इस अभियान की प्रगति और भविष्य की दिशा पर विस्तार से जानकारी दी।
समावेशी शिक्षा पर विशेष जोर
समग्र शिक्षा अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का हर बच्चा, चाहे वह किसी भी सामाजिक, आर्थिक या भौगोलिक पृष्ठभूमि से हो, शिक्षा से वंचित न रहे। विशेष रूप से वंचित वर्गों, जैसे अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक समुदाय, दिव्यांग बच्चे और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए लक्षित हस्तक्षेप किए जा रहे हैं।
आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों को मुख्यधारा में लाना
देश में अभी भी कई बच्चे ऐसे हैं जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। समग्र शिक्षा अभियान के तहत इन “आउट-ऑफ-स्कूल” बच्चों की पहचान कर उन्हें फिर से शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके लिए ब्रिज कोर्स, विशेष प्रशिक्षण केंद्र और सामुदायिक जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं।
नामांकन और ट्रांजिशन में सुधार
सरकार ने बताया कि स्कूलों में नामांकन (Enrolment) और एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाने (Transition) की दर में सुधार लाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। खासकर माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर छात्रों के ड्रॉपआउट को कम करने के लिए छात्रवृत्ति, मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बुनियादी ढांचा
समग्र शिक्षा अभियान केवल नामांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाने पर जोर देता है। इसके अंतर्गत स्कूलों में बुनियादी ढांचे का विकास, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लर्निंग, शिक्षक प्रशिक्षण और नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम सुधार जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
GER (Gross Enrolment Ratio) बढ़ाने की दिशा में प्रयास
सरकार का लक्ष्य शिक्षा के सभी स्तरों पर GER (सकल नामांकन अनुपात) को बढ़ाना है, ताकि अधिक से अधिक बच्चे स्कूल और उच्च शिक्षा से जुड़ सकें। इसके लिए राज्यों के साथ मिलकर क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनाई जा रही हैं।
राज्यों की भूमिका और सहयोग
समग्र शिक्षा अभियान की सफलता में राज्यों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए कार्य कर रही हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर आने वाली चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
निष्कर्ष
समग्र शिक्षा अभियान भारत की शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी और समान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने में मदद कर रहा है, बल्कि यह सुनिश्चित भी कर रहा है कि हर बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सके। राज्यसभा में दिए गए जवाब से यह स्पष्ट है कि सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है और आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम और अधिक देखने को मिलेंगे।