
चित्रकूट (कर्वी): बुन्देलखण्ड के पाठा क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर चल रहा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में शहीद स्मारक पार्क, एलआईसी तिराहा कर्वी में जारी क्रमिक अनशन बुधवार को दसवें दिन भी बिना रुके जारी रहा। खराब मौसम—आंधी, बारिश और तेज हवाओं—के बावजूद आंदोलनकारियों का जोश और हौसला कम नहीं हुआ, बल्कि उनका संकल्प और मजबूत होता दिखा।
आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि यह सिर्फ मांगों का आंदोलन नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास और अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक उनकी जायज मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे घर वापसी नहीं करेंगे और संघर्ष जारी रहेगा।
जनसमस्याओं के समाधान की मांग तेज
पाठा क्षेत्र लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और रोजगार जैसी आवश्यक सुविधाएं यहां के लोगों के लिए आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को ज्ञापन देकर समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला, समाधान नहीं।
ये हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें
आंदोलनकारियों ने जिन मुद्दों को लेकर आवाज उठाई है, वे सीधे तौर पर आम जनजीवन से जुड़े हैं—
- देवांगना घाटी से ददरी-मारकुंडी मार्ग का चौड़ीकरण
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रुकमा खुर्द में एंबुलेंस व स्टाफ की व्यवस्था
- रुकमा बुजुर्ग में पुस्तकालय संचालन और अन्य गांवों में पुस्तकालय निर्माण
- खेलो इंडिया योजना के तहत स्टेडियम निर्माण
- डिग्री कॉलेज व इंटर कॉलेज की स्थापना
- पशु अस्पताल में डॉक्टर, पानी व रास्ते की सुविधा
- बिजली कटौती व लो वोल्टेज की समस्या का समाधान
- हर घर जल योजना का जल्द क्रियान्वयन
- तालाबों का सौंदर्यीकरण व सड़कों की मरम्मत
- कर्वी से मारकुंडी तक सरकारी बस सेवा
- माडो बांध की मरम्मत व नहर की खुदाई
- हर ग्राम पंचायत में श्मशान घाट का निर्माण
- ददरी माफी में पुलिस चौकी की स्थापना
- रेलवे स्टेशनों पर फ्लाईओवर/अंडरपास
- रोजगार के साधनों का सृजन कर पलायन रोकना
- स्कूलों में आधुनिक तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा
- रुकमा खुर्द न्याय पंचायत को कर्वी तहसील में शामिल करना
- कर्वी में ऑटो रिक्शा स्टैंड का निर्माण
समर्थन में उमड़ी भीड़
अनशन स्थल पर क्षेत्र के कई गणमान्य लोग और स्थानीय निवासी लगातार पहुंचकर आंदोलनकारियों का समर्थन कर रहे हैं। अधिवक्ता प्रखर पटेल, समाजसेवी मुकेश कुमार सहित अनेक युवा और ग्रामीण इस आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
लगातार दस दिनों से चल रहे इस अनशन ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। यदि जल्द ही कोई सकारात्मक पहल नहीं की जाती, तो यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। क्षेत्र के लोगों की उम्मीदें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
निष्कर्ष
पाठा क्षेत्र का यह आंदोलन केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत में विकास की असमानताओं को भी उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इस आवाज को अनसुना करता है, या फिर जल्द ही कोई ठोस कदम उठाकर क्षेत्रवासियों को राहत देता है।