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भाजपा सरकार में एयरपोर्ट परियोजनाओं पर उठते सवाल: विकास या दिखावा?

सांकेतिक तस्वीर

भारत में बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर पिछले कुछ वर्षों में बड़े-बड़े दावे किए गए हैं। खासकर हवाई अड्डों के निर्माण और विस्तार को विकास का प्रतीक बताया गया। लेकिन अब इन परियोजनाओं को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं, खासतौर पर उत्तर प्रदेश में, जहां कई नए एयरपोर्ट बनाए गए या घोषित किए गए थे।

आलोचकों का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार द्वारा बनाए गए नए एयरपोर्टों में से कई या तो पूरी तरह चालू नहीं हो पाए हैं या फिर वहां से नियमित उड़ानें नहीं चल रही हैं। यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन परियोजनाओं पर अरबों रुपये खर्च किए गए हैं। यदि 7 में से 6 एयरपोर्ट बंद या निष्क्रिय हैं, तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी का मामला बनता है, बल्कि विकास के मॉडल पर भी सवाल खड़ा करता है।

क्या है असली समस्या?

एयरपोर्ट बनाना अपने आप में विकास नहीं है। असली चुनौती उन्हें सफलतापूर्वक संचालित करना होती है। कई जगहों पर एयरपोर्ट तो बन गए, लेकिन वहां यात्रियों की संख्या बहुत कम है, एयरलाइंस की रुचि नहीं है, और बुनियादी सुविधाएं भी अधूरी हैं। ऐसे में ये एयरपोर्ट सिर्फ दिखावे के प्रोजेक्ट बनकर रह जाते हैं।

इसके अलावा, “उड़ान योजना” (UDAN) का उद्देश्य छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना था। लेकिन कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि कई रूट्स पर नियमित उड़ानें नहीं चल पा रही हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या योजना का सही तरीके से क्रियान्वयन हुआ है या नहीं।

भ्रष्टाचार के आरोप

विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इन परियोजनाओं में पारदर्शिता की कमी रही है। उनका कहना है कि ठेके अपने करीबी लोगों या कंपनियों को दिए गए, जिससे गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोगिता पर असर पड़ा। यदि यह सच है, तो यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं बल्कि जनता के विश्वास के साथ भी खिलवाड़ है।

जमीनी हकीकत

उत्तर प्रदेश के कई छोटे हवाई अड्डों की स्थिति यह बताती है कि वहां नियमित गतिविधि नहीं है। कुछ जगहों पर तो एयरपोर्ट के रनवे के आसपास घास उगने की खबरें भी सामने आई हैं, जो इस बात का संकेत है कि उनका उपयोग बेहद सीमित है।

क्या होना चाहिए आगे?

अगर सरकार वास्तव में विकास चाहती है, तो केवल निर्माण पर ध्यान देने के बजाय संचालन, यात्री संख्या, और आर्थिक व्यवहार्यता पर भी ध्यान देना होगा। साथ ही, परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

निष्कर्ष

हवाई अड्डों का निर्माण एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है, लेकिन तभी जब वे जनता के लिए उपयोगी साबित हों। केवल बड़े-बड़े उद्घाटन और घोषणाएं विकास का प्रमाण नहीं होतीं। जरूरत है ठोस योजना, सही क्रियान्वयन और ईमानदार नीयत की, ताकि जनता का पैसा सही दिशा में उपयोग हो सके और देश का वास्तविक विकास हो।

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