29 मार्च 2026 को के 132वें एपिसोड में ने देशवासियों से संवाद करते हुए वैश्विक चुनौतियों, जनभागीदारी, युवाशक्ति, खेल, शिक्षा, जल संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। यह संबोधन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक को प्रेरित करने वाला संदेश बनकर सामने आया।

🌍 वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूती
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों से की। उन्होंने बताया कि कोविड के बाद जहां दुनिया नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ रही थी, वहीं युद्ध और संघर्षों ने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। खासकर ऊर्जा संकट के कारण पेट्रोल-डीजल की स्थिति प्रभावित हो रही है।
इसके बावजूद भारत अपने मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आत्मनिर्भरता के दम पर इन परिस्थितियों का सामना कर रहा है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि अफवाहों से दूर रहें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
📜 “ज्ञान भारतम” सर्वे: विरासत को सहेजने का अभियान
इस बार “मन की बात” में एक अनोखे प्रयास—ज्ञान भारतम सर्वे—का जिक्र हुआ। इसका उद्देश्य देशभर में बिखरी पांडुलिपियों को एकत्र करना और उन्हें संरक्षित करना है।
अरुणाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और लद्दाख जैसे राज्यों से लोगों ने ताड़पत्र, तांबे की प्लेट और विभिन्न लिपियों में लिखी पांडुलिपियां साझा की हैं। यह पहल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान देने का काम कर रही है।
🧑🎓 युवाशक्ति और MY Bharat की भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और युवा ही राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत हैं। के माध्यम से युवाओं को नीति-निर्माण और विकास से जोड़ा जा रहा है।
Budget Quest जैसे कार्यक्रमों में लाखों युवाओं ने भाग लेकर अपने विचार साझा किए, जिससे यह साबित होता है कि आज का युवा देश के भविष्य को लेकर सजग और सक्रिय है।
🏏 खेलों में नई ऊंचाइयां
खेल जगत में भारत की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने में भारत की जीत और रणजी ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक सफलता का उल्लेख किया।
उन्होंने खिलाड़ियों जैसे पारस डोगरा और आकिब नबी के प्रदर्शन की सराहना की। साथ ही युवा एथलीट गुलवीर सिंह और स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह की उपलब्धियों को भी प्रेरणादायक बताया।
💪 फिटनेस और स्वास्थ्य पर जोर
प्रधानमंत्री ने नागरिकों को फिट रहने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि योग और संतुलित आहार अपनाना जरूरी है। उन्होंने चीनी (Sugar) और तेल के सेवन को कम करने की सलाह दी, ताकि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचा जा सके।
🎓 शिक्षा में नवाचार और प्रयोग
बेंगलुरु के का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे यह संस्था छात्रों को रिसर्च और प्रयोग के माध्यम से विज्ञान सीखने के लिए प्रेरित कर रही है।
इसी तरह नागालैंड की पारंपरिक “मोरूंग” शिक्षा प्रणाली भी आधुनिक शिक्षा के साथ सांस्कृतिक मूल्यों को जोड़ने का काम कर रही है।
💧 जल संरक्षण: जनभागीदारी की ताकत
देश में जल संरक्षण को लेकर हो रहे प्रयासों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले वर्षों में लाखों जल संरचनाएं बनाई गई हैं।
त्रिपुरा के वांगमुन गांव, छत्तीसगढ़ के कोरिया और तेलंगाना के मुधिगुंटा गांव जैसे उदाहरण बताते हैं कि सामुदायिक प्रयासों से जल संकट को दूर किया जा सकता है।
🐟 मत्स्य पालन और आत्मनिर्भरता
प्रधानमंत्री ने मछुआरों के योगदान को सराहते हुए बताया कि कैसे तकनीक और सरकारी योजनाओं की मदद से उनका जीवन बेहतर हो रहा है।
ओडिशा की सुजाता भूयान और लक्षद्वीप की हाव्वा गुलजार जैसी महिलाओं की सफलता की कहानियां आत्मनिर्भर भारत की मजबूत तस्वीर पेश करती हैं।
🌱 पर्यावरण और जनभागीदारी
वाराणसी में एक ही घंटे में 2.5 लाख से अधिक पौधे लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाने का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सामूहिक प्रयास बड़े बदलाव ला सकते हैं।
“एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी पैदा करते हैं।
☀️ सौर ऊर्जा क्रांति
के प्रभाव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे यह योजना लोगों को ऊर्जा आत्मनिर्भर बना रही है।
गुजरात, मेरठ और जयपुर के उदाहरणों के जरिए उन्होंने दिखाया कि सौर ऊर्जा न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि आय का भी एक मजबूत स्रोत बन रही है।
✨ निष्कर्ष: “मन की बात” – प्रेरणा का मंच
“मन की बात” का यह एपिसोड एक बार फिर साबित करता है कि यह कार्यक्रम केवल संवाद नहीं, बल्कि देश की सामूहिक चेतना का प्रतिबिंब है।
जनभागीदारी, नवाचार, युवा शक्ति और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों के माध्यम से प्रधानमंत्री ने यह संदेश दिया कि जब देश का हर नागरिक आगे बढ़ने का संकल्प लेता है, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।
👉 अंत में उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने आसपास की प्रेरक कहानियां साझा करें, क्योंकि छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े बदलाव की नींव बनते हैं।
यह “मन की बात” का संदेश हमें यही सिखाता है—एकजुटता, जागरूकता और सकारात्मक सोच से ही भारत एक मजबूत और विकसित राष्ट्र बन सकता है। 🇮🇳