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नए मंगलौर बंदरगाह पर बर्थ संख्या-9 का पुनर्विकास: भारत की समुद्री ताकत को नई दिशा

भारत सरकार के द्वारा समुद्री क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय लिया गया है। सरकार ने पर बर्थ संख्या-9 के पुनर्विकास को मंजूरी दी है, जो देश की तरल थोक क्षमता और समुद्री दक्षता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य करेगा। यह परियोजना न केवल बंदरगाह के आधुनिकीकरण का प्रतीक है, बल्कि भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार में मजबूत बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम भी है।

सांकेतिक तस्वीर

इस परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत DBFOT (डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण) प्रणाली पर विकसित किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री की स्वीकृति के बाद यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ेगी। लगभग 438.29 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना 2 वर्षों में तैयार होने की संभावना है, जबकि इसकी कुल रियायत अवधि 30 वर्ष निर्धारित की गई है।

पुनर्विकास के तहत मौजूदा बर्थ की गहराई को 10.5 मीटर से बढ़ाकर 14 मीटर किया जाएगा, और भविष्य में इसे 19.8 मीटर तक विस्तारित करने का प्रावधान रखा गया है। इससे बंदरगाह पर 2,00,000 डेडवेट टन (DWT) तक के बड़े जहाज, विशेषकर वीएलजीसी (Very Large Gas Carrier), आसानी से आ-जा सकेंगे। यह क्षमता वृद्धि देश में कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद (POL) और एलपीजी जैसी ऊर्जा सामग्रियों के आयात-निर्यात को अधिक सुगम बनाएगी।

इस परियोजना के लागू होने के बाद बंदरगाह की तरल थोक माल ढुलाई क्षमता बढ़कर 10.90 मिलियन टन प्रति वर्ष हो जाएगी। साथ ही, न्यूनतम गारंटीकृत कार्गो (MGC) के रूप में 7.63 मिलियन टन प्रति वर्ष सुनिश्चित किया गया है, जिससे बंदरगाह को स्थिर राजस्व प्राप्त होगा। आधुनिक मशीनरी जैसे उच्च क्षमता वाले मरीन अनलोडिंग आर्म्स और स्वचालित मूरिंग सिस्टम से परिचालन दक्षता में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें अत्याधुनिक अग्निशमन प्रणाली, नाइट्रोजन उत्पादन स्किड और एकीकृत नियंत्रण प्रणाली जैसी सुविधाएं शामिल की जाएंगी, जिससे खतरनाक तरल पदार्थों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

रणनीतिक रूप से, यह परियोजना कर्नाटक और केरल के भीतरी क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री प्रवेश द्वार के रूप में न्यू मैंगलोर बंदरगाह की भूमिका को और सुदृढ़ करेगी। इससे व्यापार को गति मिलेगी, औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।

इस पहल के पीछे के नेतृत्व में भारत को एक वैश्विक समुद्री शक्ति बनाने की व्यापक दृष्टि स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और लॉजिस्टिक्स सुधार के माध्यम से भारत न केवल अपनी आंतरिक जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ा रहा है।

अंततः, न्यू मैंगलोर बंदरगाह पर बर्थ संख्या-9 का यह पुनर्विकास परियोजना भारत की आर्थिक प्रगति, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापारिक स्थिति को सशक्त बनाने में एक मील का पत्थर साबित होगी।

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