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भारत का सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम

सांकेतिक तस्वीर

भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए अब अगले चरण की ओर कदम बढ़ा दिया है। सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआती सफलता के बाद सरकार ने इस वर्ष के बजट में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की है। यह पहल देश को वैश्विक चिप निर्माण हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

उपकरण और सामग्री निर्माण पर विशेष ध्यान

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का मुख्य फोकस अब केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए आवश्यक उपकरण (Equipment) और सामग्री (Materials) के घरेलू उत्पादन पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे भारत की विदेशी निर्भरता कम होगी और सप्लाई चेन अधिक मजबूत बनेगी। वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बीच यह कदम भारत को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगा।

अनुसंधान और कौशल विकास को बढ़ावा

भारत सरकार इंडस्ट्री-नेतृत्व वाले अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्रों को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य नई तकनीकों का विकास करना और भविष्य के लिए तैयार एक कुशल कार्यबल (Skilled Workforce) तैयार करना है।
सरकार का लक्ष्य है कि जल्द ही देश में 85,000 से अधिक डिजाइन पेशेवर तैयार किए जाएं, जो इस उद्योग की रीढ़ साबित होंगे।

‘चिप-टू-स्टार्टअप’ कार्यक्रम की भूमिका

सेमीकंडक्टर डिजाइन को प्रोत्साहित करने के लिए ‘चिप-टू-स्टार्टअप’ कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस पहल के तहत स्टार्टअप्स और छात्रों को आधुनिक डिजाइन टूल्स और संसाधनों तक पहुंच प्रदान की जा रही है।
आज देश के करीब 400 विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप्स को इन अत्याधुनिक टूल्स से जोड़ा गया है, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 55 से अधिक चिप्स का डिजाइन और निर्माण किया जा चुका है। यह भारत के नवाचार इकोसिस्टम के तेजी से विकसित होने का प्रमाण है।

तेजी से बढ़ता बाजार

इंडस्ट्री के अनुमानों के अनुसार, भारत का सेमीकंडक्टर बाजार वर्तमान में लगभग 50 बिलियन डॉलर (करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये) का है। उम्मीद है कि इस दशक के अंत तक यह बाजार 100 बिलियन डॉलर (करीब 9 लाख करोड़ रुपये) को पार कर जाएगा।
यह वृद्धि न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत को वैश्विक तकनीकी शक्ति के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगी।

निष्कर्ष

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 भारत के लिए एक रणनीतिक और दूरदर्शी पहल है। उपकरण और सामग्री निर्माण, अनुसंधान, स्टार्टअप्स को समर्थन और कुशल मानव संसाधन के विकास पर जोर देकर भारत एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार कर रहा है।
यदि यह प्रयास इसी गति से आगे बढ़ता रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल अपनी जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भी एक प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरेगा।

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