Site icon HIT AND HOT NEWS

भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास का आधार है। उनके अनुसार, शिक्षा वह शक्ति है जो व्यक्ति के विचारों को परिष्कृत करती है और उसे जीवन में सही दिशा प्रदान करती है।

सांकेतिक तस्वीर

प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में एक संस्कृत सुभाषित का उल्लेख करते हुए उसकी गहरी व्याख्या भी की। यह सुभाषित बताता है कि शुद्ध और संस्कारित बुद्धि व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति होती है। ऐसी बुद्धि न केवल कठिन परिस्थितियों से उबरने में सहायता करती है, बल्कि सफलता, प्रतिष्ठा और आंतरिक शांति भी प्रदान करती है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज भारत की युवा पीढ़ी शिक्षा के बल पर हर क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही है। विज्ञान, तकनीक, खेल, उद्योग और कला जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय युवाओं की उपलब्धियाँ यह सिद्ध करती हैं कि यदि शिक्षा सही दिशा में मिले, तो वह राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (formerly Twitter) पर अपने विचार साझा करते हुए लिखा कि शिक्षा एक ऐसी अमूल्य पूंजी है, जिसे कोई छीन नहीं सकता। यह व्यक्ति के भीतर छिपी क्षमताओं को उजागर करती है और उसे आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती है।

संस्कृत सुभाषित का सार यह है कि एक निर्मल और जागरूक बुद्धि व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करती है, उसके यश को बढ़ाती है और उसे मानसिक रूप से शुद्ध व संतुलित बनाती है। ऐसी बुद्धि को ‘कामधेनु’ के समान माना गया है, जो हर प्रकार की इच्छाओं को पूर्ण करने की क्षमता रखती है।

अंततः, यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को उत्कृष्ट बनाने की प्रक्रिया है। एक शिक्षित और जागरूक समाज ही मजबूत और समृद्ध राष्ट्र की नींव रखता है।

Exit mobile version