हाल ही में ने एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड बनाम झारखंड राज्य मामले में एक अहम निर्णय दिया, जिसमें मुख्य विवाद मध्यस्थता (Arbitration) के अधिकार क्षेत्र को लेकर था। यह फैसला 1 अप्रैल 2026 को सुनाया गया।
मामला क्या था?
इस केस में एक निर्माण कंपनी और झारखंड सरकार के बीच इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट (एलिवेटेड कॉरिडोर) को लेकर अनुबंध हुआ था।
- प्रोजेक्ट: जमशेदपुर में 4-लेन एलिवेटेड रोड
- अनुबंध समाप्ति: 22 अक्टूबर 2020
- विवाद: अनुबंध समाप्त करने और भुगतान/गारंटी को लेकर
इसके बाद कंपनी ने मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू की और विवाद को सुलझाने के लिए Arbitrator नियुक्त किया गया।
कोर्ट में क्या मुद्दा उठा?
मुख्य सवाल यह था कि:
👉 क्या इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट में हो सकती है?
या
👉 केवल रांची की अदालतों को ही अधिकार है?
याचिकाकर्ता (कंपनी) का तर्क
कंपनी ने कहा:
- पहले उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में धारा 9 के तहत याचिका दायर की थी
- इसलिए की धारा 42 लागू होगी
- यानी, एक बार जिस कोर्ट में मामला गया, आगे की सारी कार्यवाही वहीं होगी
साथ ही उन्होंने कहा कि SAROD नियमों के अनुसार नई दिल्ली ही Arbitration की Seat है
झारखंड सरकार का तर्क
राज्य सरकार ने कहा:
- अनुबंध में साफ लिखा है कि
✔ Arbitration का स्थान (Venue) = रांची
✔ कोर्ट का अधिकार = केवल रांची - दिल्ली में पहले की याचिका withdraw (वापस) हो गई थी
- उस पर कोई फैसला नहीं हुआ, इसलिए धारा 42 लागू नहीं होगी
कोर्ट का विश्लेषण
1. धारा 42 लागू नहीं होगी
कोर्ट ने कहा:
- केवल याचिका फाइल करना काफी नहीं है
- जरूरी है कि कोर्ट ने उस पर वास्तव में सुनवाई और निर्णय किया हो
- यहाँ याचिका जल्दी ही वापस ले ली गई थी
👉 इसलिए दिल्ली कोर्ट का अधिकार स्थापित नहीं हुआ
2. “Seat vs Venue” का महत्वपूर्ण अंतर
कोर्ट ने समझाया:
- Seat (सीट) = कानूनी नियंत्रण का केंद्र
- Venue (स्थान) = केवल सुनवाई की जगह
लेकिन अगर:
✔ Venue तय हो
✔ और उसी जगह की कोर्ट को exclusive jurisdiction मिले
👉 तो वही जगह Seat मानी जाती है
3. SAROD नियम क्यों लागू नहीं हुए?
SAROD नियम कहते हैं:
👉 अगर पक्ष तय न करें, तो Seat = नई दिल्ली
लेकिन कोर्ट ने कहा:
- यहाँ पक्षों ने खुद अनुबंध में रांची तय किया है
- इसलिए SAROD का default नियम लागू नहीं होगा
कोर्ट का अंतिम फैसला
👉 कोर्ट ने साफ कहा:
- Arbitration की Seat = रांची
- अधिकार क्षेत्र = केवल रांची की अदालतें
- दिल्ली हाई कोर्ट के पास अधिकार नहीं
👉 इसलिए याचिका खारिज कर दी गई
फैसले का महत्व
यह निर्णय कई कारणों से महत्वपूर्ण है:
✔ 1. Contract की शर्तें सबसे ऊपर
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुबंध में जो लिखा है, वही प्राथमिक होगा।
✔ 2. Section 42 का सही उपयोग
सिर्फ याचिका डालने से अधिकार नहीं बनता।
✔ 3. Seat vs Venue की स्पष्टता
यह फैसला Arbitration मामलों में बहुत उपयोगी मार्गदर्शन देता है।
निष्कर्ष
इस केस में ने यह स्पष्ट कर दिया कि:
- अधिकार क्षेत्र का निर्धारण अनुबंध और पक्षों की मंशा से होता है
- Default नियम (जैसे SAROD) केवल तब लागू होते हैं जब अनुबंध चुप हो
- गलत कोर्ट में केस दायर करने से समय और संसाधन दोनों का नुकसान होता है
