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दिल्ली हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शंस बनाम झारखंड राज्य (2026)


हाल ही में ने एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड बनाम झारखंड राज्य मामले में एक अहम निर्णय दिया, जिसमें मुख्य विवाद मध्यस्थता (Arbitration) के अधिकार क्षेत्र को लेकर था। यह फैसला 1 अप्रैल 2026 को सुनाया गया।


मामला क्या था?

इस केस में एक निर्माण कंपनी और झारखंड सरकार के बीच इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट (एलिवेटेड कॉरिडोर) को लेकर अनुबंध हुआ था।

इसके बाद कंपनी ने मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू की और विवाद को सुलझाने के लिए Arbitrator नियुक्त किया गया।


कोर्ट में क्या मुद्दा उठा?

मुख्य सवाल यह था कि:

👉 क्या इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट में हो सकती है?
या
👉 केवल रांची की अदालतों को ही अधिकार है?


याचिकाकर्ता (कंपनी) का तर्क

कंपनी ने कहा:

साथ ही उन्होंने कहा कि SAROD नियमों के अनुसार नई दिल्ली ही Arbitration की Seat है


झारखंड सरकार का तर्क

राज्य सरकार ने कहा:


कोर्ट का विश्लेषण

1. धारा 42 लागू नहीं होगी

कोर्ट ने कहा:

👉 इसलिए दिल्ली कोर्ट का अधिकार स्थापित नहीं हुआ


2. “Seat vs Venue” का महत्वपूर्ण अंतर

कोर्ट ने समझाया:

लेकिन अगर:

✔ Venue तय हो
✔ और उसी जगह की कोर्ट को exclusive jurisdiction मिले

👉 तो वही जगह Seat मानी जाती है


3. SAROD नियम क्यों लागू नहीं हुए?

SAROD नियम कहते हैं:

👉 अगर पक्ष तय न करें, तो Seat = नई दिल्ली

लेकिन कोर्ट ने कहा:


कोर्ट का अंतिम फैसला

👉 कोर्ट ने साफ कहा:

👉 इसलिए याचिका खारिज कर दी गई


फैसले का महत्व

यह निर्णय कई कारणों से महत्वपूर्ण है:

✔ 1. Contract की शर्तें सबसे ऊपर

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुबंध में जो लिखा है, वही प्राथमिक होगा।

✔ 2. Section 42 का सही उपयोग

सिर्फ याचिका डालने से अधिकार नहीं बनता।

✔ 3. Seat vs Venue की स्पष्टता

यह फैसला Arbitration मामलों में बहुत उपयोगी मार्गदर्शन देता है।


निष्कर्ष

इस केस में ने यह स्पष्ट कर दिया कि:


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