
देशभर में सामाजिक न्याय और समानता के अग्रदूत महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत के सर्वोच्च नेतृत्व ने एकजुट होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके विचारों को वर्तमान समय में और अधिक प्रासंगिक बताया।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने महात्मा फुले की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस दौरान सभी नेताओं ने फुले जी के समाज सुधार के योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा फुले ने समाज में व्याप्त भेदभाव और असमानता के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम माना और महिलाओं तथा वंचित वर्गों को शिक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर फुले जी के विचारों को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन हमें सामाजिक न्याय, समान अवसर और मानवता के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज का भारत उन्हीं आदर्शों पर आगे बढ़ रहा है, जिनकी नींव महात्मा फुले जैसे महान समाज सुधारकों ने रखी थी।
महात्मा ज्योतिबा फुले ने 19वीं सदी में समाज में व्याप्त जाति प्रथा, छुआछूत और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर लड़कियों की शिक्षा के लिए पहला स्कूल खोला, जो उस समय एक क्रांतिकारी कदम था। उनके प्रयासों ने भारतीय समाज में जागरूकता और बदलाव की नई लहर पैदा की।
इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में संगोष्ठियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों का आयोजन किया गया। स्कूलों और कॉलेजों में भी फुले जी के जीवन और उनके विचारों पर विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए, ताकि नई पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सके।
महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती केवल एक स्मरण का अवसर नहीं है, बल्कि यह उनके विचारों को आत्मसात करने और समाज में समानता, शिक्षा और न्याय की भावना को मजबूत करने का संकल्प लेने का भी समय है। आज के दौर में, जब समाज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, फुले जी के विचार हमें सही दिशा दिखाने में सक्षम हैं।
