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ग्राम सभा ऐमापुर बिंधन की स्थिति आज भी विकास से कोसों दूर




कुंडा प्रतापगढ़l बाबागंज ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा ऐमापुर बिंधन के चितामनपुर गांव की स्थिति आज भी विकास से कोसों दूर नजर आती है। यहां के ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता के कारण उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। सबसे गंभीर समस्या गांव को जोड़ने वाली सड़क की है, जो पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और लोगों के लिए मुसीबत का कारण बन गई है।

चितामनपुर गांव में स्थित बाबा इंद्रेश्वर नाथ धाम तक जाने वाली सड़क श्रद्धालुओं के लिए आस्था का मार्ग है, वहीं यह रास्ता स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के दैनिक आवागमन का भी प्रमुख साधन है। इसके बावजूद इस सड़क की मरम्मत या निर्माण के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब सड़क कीचड़ और जलभराव से भर जाती है। ऐसे में लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार बाबागंज के बीडीओ और प्रतापगढ़ के मुख्य विकास अधिकारी को इस समस्या से अवगत कराया है। लिखित शिकायतें दी गईं, मौखिक रूप से भी गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार “बजट की कमी” का हवाला देकर मामले को टाल दिया गया। यह रवैया न केवल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि ग्रामीणों के प्रति संवेदनहीनता को भी उजागर करता है।

इस समस्या का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। उन्हें स्कूल पहुंचने के लिए कई किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं बुजुर्ग और महिलाएं खराब सड़क के कारण मंदिर तक नहीं पहुंच पातीं, जिससे उनकी धार्मिक आस्था भी आहत हो रही है। यह स्थिति केवल असुविधा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन के हर पहलू पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।

ग्राम प्रधान पर भी विकास कार्यों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर ईमानदारी से प्रयास किए जाते, तो अब तक सड़क का निर्माण हो चुका होता। लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और कथित मनमानी के कारण गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।

गांव में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। लोग अब खुलकर विरोध की बात करने लगे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या प्रशासन वास्तव में संसाधनों की कमी से जूझ रहा है या फिर यह केवल जिम्मेदारी से बचने का एक बहाना है।

आवश्यकता इस बात की है कि संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता के आधार पर लें। सड़क निर्माण के लिए तुरंत बजट की व्यवस्था की जाए और कार्य को शीघ्र शुरू किया जाए। यह केवल एक सड़क का मुद्दा नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन स्तर, शिक्षा, स्वास्थ्य और आस्था से जुड़ा हुआ सवाल है।

यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह असंतोष एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर ही होगी। अब समय आ गया है कि विकास के वादों को जमीनी हकीकत में बदला जाए और चितामनपुर गांव को भी मूलभूत सुविधाओं से जोड़ा जाए।

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