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कुंडा की माटी का नाम फिर गूंजा विश्व में, आचार्य देवव्रतजी महाराज सनातन धर्म के प्रचार में बढ़ा रहे क्षेत्र का मान



प्रतापगढ़ जनपद के कुंडा क्षेत्र की पावन माटी एक बार फिर देश-विदेश में अपनी पहचान बना रही है। जिस प्रकार कृपालु जी महाराज ने अपने आध्यात्मिक कार्यों से कुंडा का नाम विश्व पटल पर स्थापित किया था, उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अब कुंडा के एक और युवा संत आचार्य देवव्रतजी महाराज सनातन धर्म की पताका को ऊंचा कर रहे हैं।

मुंबई से संचालित अपने आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से आचार्य देवव्रतजी महाराज देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक सनातन धर्म का संदेश पहुंचा रहे हैं। उनके सत्संग, प्रवचन और धार्मिक आयोजनों में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी लोग उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शन का लाभ लेने के लिए आ रहे हैं, जिससे कुंडा क्षेत्र का नाम निरंतर गौरवान्वित हो रहा है।

आचार्य देवव्रतजी महाराज भारतीय संस्कृति, वेद-पुराणों और सनातन परंपराओं के संरक्षण पर विशेष बल देते हैं। उनके प्रवचनों में जीवन मूल्यों, आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता का संदेश प्रमुख रूप से दिया जाता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके सरल और प्रभावशाली विचार युवाओं को भी संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

बताया जाता है कि आचार्य देवव्रतजी महाराज को आध्यात्मिक संस्कार अपने पिता संतोषजी महाराज से प्राप्त हुए हैं, जो स्वयं लंबे समय से संत समाज में सक्रिय रहकर सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में कार्यरत हैं। पिता-पुत्र दोनों ही धर्म, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों में गर्व का माहौल है कि कुंडा की धरती से जुड़े संत देश और विदेश में सनातन धर्म का प्रचार कर रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इस प्रकार के आध्यात्मिक कार्यों से न केवल कुंडा का नाम रोशन हो रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी संस्कृति पर गर्व करने की प्रेरणा मिल रही है।

इस प्रकार कुंडा की माटी एक बार फिर आध्यात्मिक जगत में अपनी पहचान मजबूत कर रही है और सनातन धर्म के क्षेत्र में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रही है।

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