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IBC संशोधन कानून 2026 लागू: दिवालिया प्रक्रिया में आएगी तेजी और पारदर्शिता

सांकेतिक तस्वीर

भारत की आर्थिक और वित्तीय व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) Amendment Act, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। इस संशोधन के लागू होने से दिवालियापन से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी आएगी, साथ ही निवेशकों और लेनदारों का विश्वास भी बढ़ेगा।

क्या है IBC कानून?

IBC यानी दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code) को वर्ष 2016 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य था कि कंपनियों या व्यक्तियों के दिवालिया होने की स्थिति में एक समयबद्ध और व्यवस्थित प्रक्रिया के माध्यम से समाधान निकाला जाए। अब 2026 का संशोधन इस कानून को और अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के लिए लाया गया है।

दिवालिया मामलों का निपटारा होगा तेज

नए संशोधन के तहत दिवालिया मामलों के समाधान की समय-सीमा को और सख्ती से लागू किया जाएगा। इससे वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों में तेजी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी। डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देकर केस ट्रैकिंग और सुनवाई को भी सरल बनाया जाएगा।

क्रॉस-बॉर्डर दिवालियापन के नए नियम

IBC Amendment Act, 2026 की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें क्रॉस-बॉर्डर इनसॉल्वेंसी यानी अंतरराष्ट्रीय दिवालिया मामलों के लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। अब यदि किसी भारतीय कंपनी की संपत्ति विदेश में है या कोई विदेशी कंपनी भारत में दिवालिया होती है, तो इन मामलों का समाधान आसान और व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। इससे भारत में विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा।

लेनदारों की सुरक्षा में बढ़ोतरी

इस संशोधन में लेनदारों (Creditors) के हितों को विशेष महत्व दिया गया है। उनके अधिकारों को और स्पष्ट किया गया है ताकि उन्हें समय पर और उचित भुगतान मिल सके। साथ ही, कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) की भूमिका को और मजबूत किया गया है, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी।

MSME और स्टार्टअप्स को राहत

सरकार ने छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) तथा स्टार्टअप्स के लिए भी इस संशोधन में कुछ राहत के प्रावधान शामिल किए हैं। इससे इन व्यवसायों को संकट की स्थिति में जल्दी समाधान पाने में मदद मिलेगी और वे दोबारा खड़े हो सकेंगे।

अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव

IBC संशोधन कानून 2026 से भारत की Ease of Doing Business रैंकिंग में सुधार होने की उम्मीद है। निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, बैंकिंग क्षेत्र की सेहत सुधरेगी और फंसे हुए कर्ज (NPA) की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।

निष्कर्ष

IBC Amendment Act, 2026 केवल एक कानूनी सुधार नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, मजबूत और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। तेज न्यायिक प्रक्रिया, बेहतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और लेनदारों की सुरक्षा—ये सभी पहलू मिलकर भारत को एक मजबूत आर्थिक शक्ति बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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