
बहराइच जिले में यातायात व्यवस्था को सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। घाघरा घाट पर स्थित संजय सेतु की मरम्मत को ध्यान में रखते हुए 16 अप्रैल से 14 जून 2026 तक भारी वाहनों के लिए विशेष रूट डायवर्जन लागू किया गया है। इस अवधि में केवल हल्के और आपातकालीन वाहनों को ही पीपा पुल से गुजरने की अनुमति होगी।
🔧 मरम्मत कार्य क्यों है जरूरी?
संजय सेतु, जो लखनऊ-बहराइच मार्ग की प्रमुख कड़ी है, लगभग चार दशक पुराना हो चुका है। समय के साथ इसके बेयरिंग और जॉइंट्स में तकनीकी खराबियां उत्पन्न हो गई हैं। इसके कारण पुल की सतह पर गड्ढे बन गए हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई थी।
इन्हीं जोखिमों को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पुल की व्यापक मरम्मत का निर्णय लिया है। इस दौरान आवागमन को नियंत्रित करना आवश्यक था, ताकि काम बिना बाधा के पूरा हो सके।
🛣️ वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था
भारी वाहनों के लिए प्रशासन ने अलग-अलग दिशाओं से आने-जाने वाले ट्रैफिक हेतु वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए हैं:
- बहराइच से लखनऊ की ओर जाने वाले वाहन
कैसरगंज तिराहा → जरवल टिकोनिया मोड़ → रेउसा → लखनऊ - कैसरगंज क्षेत्र से लखनऊ की ओर
यदुवंश तिराहा → बहराइच → रेउसा - प्रयागपुर व बिछुरक क्षेत्र से आने वाले वाहन
कैसरगंज तिराहा → जरवल टिकोनिया → बहराइच → रेउसा - नानपारा व मिहीगंज दिशा से आने वाले वाहन
जरवल तिराहा → कैसरगंज → टिकोनिया मोड़
वहीं, कार, बाइक और एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहन घाघरा नदी पर बनाए गए अस्थायी पीपा पुल का उपयोग कर सकेंगे।
⏳ दो महीने तक रहेगी व्यवस्था लागू
यह डायवर्जन 16 अप्रैल से शुरू होकर 14 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान ट्रक, बस, डंपर और अन्य भारी वाहनों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से ही गुजरना होगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य न केवल मरम्मत कार्य को तेज़ी से पूरा करना है, बल्कि मुख्य मार्ग पर अनावश्यक दबाव को कम करना भी है।
⚠️ प्रशासन की अपील
बहराइच पुलिस ने सभी वाहन चालकों से सहयोग की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि वे निर्धारित मार्गों का पालन करें, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन न करें और अनावश्यक यात्रा से बचें।
साथ ही, मरम्मत कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा, ताकि भविष्य में यह पुल लंबे समय तक सुरक्षित बना रहे।
🌉 समापन
संजय सेतु की मरम्मत केवल एक तकनीकी कार्य नहीं, बल्कि क्षेत्र की यातायात सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। यह पहल आने वाले समय में लखनऊ-बहराइच मार्ग को अधिक सुरक्षित, सुगम और विश्वसनीय बनाएगी।
