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पूरक पोषण योजना से सशक्त हो रहा मातृ एवं बाल स्वास्थ्य, करोड़ों लाभार्थियों को मिल रहा फायदा

देश में मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चलाई जा रही पूरक पोषण योजना के तहत 6 महीने से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरी बालिकाओं को पोषाहार उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कुपोषण को कम करना, बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास को बढ़ावा देना तथा महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार लाना है।

यह योजना एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) के माध्यम से संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए लाभार्थियों तक पूरक पोषण पहुंचाया जाता है। बच्चों को आयु के अनुसार पोषक आहार, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को अतिरिक्त पोषण तथा किशोरी बालिकाओं को स्वास्थ्य सुधार हेतु आवश्यक आहार प्रदान किया जाता है। इससे एनीमिया, कम वजन और कुपोषण जैसी समस्याओं में कमी लाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस योजना की निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। पोषण ट्रैकर के माध्यम से देशभर के 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों और करीब 9 करोड़ लाभार्थियों की लगभग रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव हो पाई है। इससे लाभार्थियों की जानकारी, पोषण वितरण और सेवाओं की उपलब्धता पर नजर रखना आसान हुआ है।

सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी और जरूरतमंदों तक सेवाएं समय पर पहुंच सकेंगी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मोबाइल ऐप के माध्यम से बच्चों का वजन, स्वास्थ्य स्थिति और पोषण वितरण का डेटा अपडेट कर रही हैं, जिससे नीतिगत निर्णय लेने में भी मदद मिल रही है।

यह पहल न केवल कुपोषण को कम करने में सहायक है, बल्कि महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास को भी बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, पूरक पोषण और नियमित निगरानी के संयोजन से आने वाले समय में देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सूचकांकों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।

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