
भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र से एक सकारात्मक खबर सामने आई है। “अन्य अनाज” श्रेणी के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मार्च 2025 में जहां इन अनाजों का निर्यात 0.03 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, वहीं मार्च 2026 में यह बढ़कर 0.06 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। यानी एक वर्ष में इस श्रेणी का निर्यात लगभग दोगुना हो गया, जो कृषि क्षेत्र के लिए उत्साहजनक संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस वृद्धि के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय अनाजों की बढ़ती मांग एक प्रमुख कारण है। बाजरा, ज्वार, मक्का और अन्य मोटे अनाजों को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जा रहा है, जिसके चलते कई देशों में इनकी खपत तेजी से बढ़ी है। भारत ने इस बढ़ती मांग का लाभ उठाते हुए निर्यात को बढ़ाने में सफलता हासिल की है।
सरकार द्वारा मोटे अनाजों को बढ़ावा देने और किसानों को प्रोत्साहन देने की नीतियों का भी इस वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बेहतर उत्पादन तकनीक, उन्नत बीज और कृषि योजनाओं के प्रभाव से उत्पादन में वृद्धि हुई, जिससे निर्यात के लिए पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सकी।
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर स्वस्थ आहार के प्रति बढ़ती जागरूकता ने भी भारतीय अन्य अनाजों की लोकप्रियता बढ़ाई है। कई देशों में ग्लूटेन-फ्री और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्यान्नों की मांग बढ़ने से भारतीय उत्पादों को नया बाजार मिला है। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने के साथ-साथ निर्यातकों को भी नए अवसर प्राप्त हुए हैं।
अन्य अनाज के निर्यात में यह वृद्धि देश के कृषि निर्यात को विविधता प्रदान करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। इससे पारंपरिक फसलों के साथ-साथ वैकल्पिक अनाजों को भी वैश्विक पहचान मिल रही है। यह प्रवृत्ति भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक साबित हो सकती है।
कुल मिलाकर, मार्च 2026 में अन्य अनाज के निर्यात में दोगुनी वृद्धि भारत के कृषि क्षेत्र की क्षमता और वैश्विक बाजार में उसकी बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में और विस्तार की संभावनाएं नजर आ रही हैं, जिससे देश के निर्यात और किसानों दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
