
भारत और भारत तथा न्यूज़ीलैंड के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को लेकर हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति प्रदान की है। यह संवाद 27 अप्रैल को प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से पहले एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, जिससे दोनों देशों के कृषि क्षेत्र में नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
उच्चस्तरीय बैठक
17 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में भारत के कृषि सचिव आतिश चंद्रा और न्यूज़ीलैंड के उच्चायुक्त पैट्रिक राटा के बीच महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इस बैठक में कृषि तकनीक के आदान-प्रदान, आधुनिक खेती के तरीकों और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर विशेष ध्यान दिया गया।
मुक्त व्यापार समझौता (FTA)
27 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे।
- भारत को न्यूज़ीलैंड के बाजार में पूर्ण शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने की संभावना।
- न्यूज़ीलैंड के अधिकांश उत्पादों पर शुल्क में कमी या समाप्ति।
- अगले पांच वर्षों में व्यापार को 5 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य।
- दीर्घकाल में निवेश को बढ़ाकर 20 अरब डॉलर तक पहुँचाने की योजना।
बागवानी क्षेत्र में सहयोग
फरवरी 2026 में दोनों देशों ने बागवानी को बढ़ावा देने पर सहमति जताई थी। इसमें कीवी जैसे फलों के उन्नत पौधों का आयात, तकनीकी सहायता और किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।
एग्रीटेक सहयोग
जनवरी 2026 में आयोजित एग्रीटेक फोरम के माध्यम से सतत कृषि, डिजिटल तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया, जिससे खेती को अधिक उत्पादक और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।
संभावित लाभ
भारतीय किसानों के लिए
- उन्नत कृषि तकनीकों और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों तक पहुंच।
- वैश्विक बाजारों में निर्यात के नए अवसर।
- फसल उत्पादकता और आय में संभावित वृद्धि।
न्यूज़ीलैंड के लिए
- भारत जैसे विशाल उपभोक्ता बाजार में प्रवेश।
- डेयरी, शहद, वाइन और फल निर्यात में विस्तार।
- दीर्घकालिक व्यापारिक साझेदारी को मजबूती।
निष्कर्ष
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच बढ़ता कृषि सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीकी प्रगति, सतत विकास और किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम है। यह साझेदारी दोनों देशों के कृषि क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने में सहायक साबित हो सकती है।
