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सीएचसी कुंडा में प्रसव पीड़ित महिलाओं के साथ अनियमितताओं का आरोप, सुविधाओं की कमी पर अधिवक्ता ने उठाए सवाल



कुंडा, प्रतापगढ़। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी कुंडा में प्रसव पीड़ित महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। कुंडा निवासी अधिवक्ता ओ.पी. यादव ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं के साथ बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की जा रही हैं और बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।

अधिवक्ता के अनुसार उन्होंने अपनी पत्नी किरण यादव को 16 अप्रैल 2026 को लगभग दोपहर 2 बजे प्रसव पीड़ा होने पर सीएचसी कुंडा लाया। उनका आरोप है कि अस्पताल के गेट पर प्रसव पीड़ित महिला के लिए एक भी स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था, जबकि दिए गए मैनुअल के अनुसार ऐसी स्थिति में तत्काल स्ट्रेचर की व्यवस्था होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि प्रसव के दौरान महिलाओं को दूध और फल दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन यहां ऐसा कोई प्रबंध नहीं किया जाता। प्रसव के बाद टांका लगने वाली महिलाओं को ऊपर वार्ड तक पहुंचने में सीढ़ियां चढ़ने में भारी दिक्कत होती है। आरोप है कि स्टाफ द्वारा महिलाओं से कहा जाता है कि ऊपर आकर फर्श पर लेट जाएं, जिससे प्रसव पीड़ित महिलाओं को मजबूरन जमीन पर ही सोना पड़ता है।

अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में महिला का नवजात शिशु अंदर रखा जाता है, जबकि प्रसव के बाद महिला को फर्श पर रहने के लिए मजबूर किया जाता है। इतना ही नहीं, स्टाफ नर्स द्वारा रात करीब 11:30 बजे गेट बंद कर दिया जाता है, जिससे आने-जाने में भी परेशानी होती है।

उन्होंने कहा कि प्रसव पीड़ित महिलाओं के लिए पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है और शौचालय भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। उनका आरोप है कि सरकार द्वारा जारी निर्देशों के विपरीत अस्पताल में व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं।

इस पूरे मामले को लेकर अधिवक्ता ने संबंधित अधिकारियों से जांच कर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो मरीजों की परेशानी और बढ़ सकती है।

वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में इस प्रकार की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है और जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक सुधार सुनिश्चित करना चाहिए।

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