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स्क्रैप से कमाई और गैर-किराया राजस्व में बढ़ोतरी: रेलवे का नया आर्थिक मॉडल

भारत में परिवहन का सबसे बड़ा माध्यम माने जाने वाले ने हाल के वर्षों में अपनी आय के स्रोतों को मजबूत करने के लिए एक प्रभावी रणनीति अपनाई है। इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है—स्क्रैप की बिक्री और गैर-किराया (Non-Fare) राजस्व में लगातार वृद्धि। इसके चलते रेलवे न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हुआ है, बल्कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं भी बिना किराया बढ़ाए उपलब्ध करा पा रहा है।

वित्त वर्ष 2025-26 में रेलवे ने स्क्रैप बिक्री से 6813.86 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय आय अर्जित की, जो निर्धारित लक्ष्य 6000 करोड़ रुपये से कहीं अधिक है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि रेलवे अब अपनी निष्क्रिय और बेकार पड़ी संपत्तियों का प्रभावी उपयोग कर रहा है। पुराने डिब्बे, लोहे के ढांचे, मशीनरी और अन्य कबाड़ को व्यवस्थित रूप से बेचकर न केवल आय बढ़ाई जा रही है, बल्कि स्थान का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित किया जा रहा है।

डिपो, यार्ड और कार्यशालाओं में अनावश्यक सामग्री को हटाकर महत्वपूर्ण जगह खाली की गई है। इससे संचालन में सुगमता आई है और कार्यक्षमता में भी सुधार हुआ है। साथ ही, पुनर्चक्रण (Recycling) को बढ़ावा मिलने से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी रेलवे ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अपशिष्ट में कमी और संसाधनों के पुन: उपयोग से रेलवे एक अधिक पर्यावरण-अनुकूल संगठन के रूप में उभर रहा है।

गैर-किराया राजस्व के क्षेत्र में भी रेलवे ने उल्लेखनीय प्रगति की है। पिछले पांच वर्षों में इस आय में 168% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो लगभग 290 करोड़ रुपये से बढ़कर 777 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यह वृद्धि रेलवे की विविध आय स्रोतों को विकसित करने की क्षमता को दर्शाती है।

रेलवे स्टेशनों पर व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 120 जनऔषधि केंद्र और 22 प्रीमियम ब्रांड आउटलेट स्थापित किए गए हैं। ये न केवल रेलवे की आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि यात्रियों को सस्ती दवाइयां और बेहतर खरीदारी का अनुभव भी प्रदान कर रहे हैं। इससे स्टेशन अब सिर्फ यात्रा का स्थान नहीं, बल्कि एक सुविधाजनक सार्वजनिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।

इस समग्र रणनीति का सबसे बड़ा लाभ यात्रियों को मिला है। अतिरिक्त आय के कारण रेलवे को किराया बढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ी, जबकि सुविधाओं में निरंतर सुधार किया जा रहा है। साफ-सफाई, बेहतर प्रतीक्षालय, आधुनिक सुविधाएं और डिजिटल सेवाएं—ये सभी बदलाव इसी आर्थिक सुदृढ़ता का परिणाम हैं।

अंततः, स्क्रैप प्रबंधन और गैर-किराया राजस्व में वृद्धि की यह पहल को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह मॉडल भविष्य में अन्य सार्वजनिक संस्थानों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है, जहां संसाधनों के बेहतर उपयोग से विकास और सेवा—दोनों को संतुलित किया जा सकता है।

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