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ग्राम सभा राजापुर में राशन कोटे पर बड़ा घोटाले का आरोप, जांच की मांग तेज



प्रतापगढ़। जनपद के ग्राम सभा राजापुर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत संचालित राशन की दुकान को लेकर गंभीर अनियमितताओं और संभावित घोटाले का मामला सामने आया है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दो नाम पर आवंटन, संचालन एक के हाथ में

ग्रामीणों के अनुसार, इस राशन कोटे का आवंटन दो व्यक्तियों—सचिन गौतम और धर्मेंद्र यादव उर्फ बबलू—के नाम पर किया गया है। नियमानुसार दोनों आवंटित व्यक्तियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि राशन दुकान का संचालन केवल एक ही व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पूरी दुकान धर्मेंद्र यादव उर्फ बबलू के स्थान से ही चलाई जा रही है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।

कोटेदार की अनुपस्थिति पर सवाल

सबसे महत्वपूर्ण आरोप यह है कि जब भी राशन का वितरण होता है, उस दौरान अधिकृत कोटेदार सचिन गौतम और धर्मेंद्र यादव मौके पर उपस्थित नहीं रहते। ऐसे में यह सवाल उठता है कि उनकी अनुपस्थिति में राशन वितरण कौन और किस अधिकार से कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना जिम्मेदार व्यक्ति की मौजूदगी के वितरण प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध हो जाती है।

मानक से कम राशन देने का आरोप

ग्रामवासियों का आरोप है कि उन्हें निर्धारित सरकारी मानकों के अनुसार पूरा राशन नहीं दिया जाता। कई कार्डधारकों ने बताया कि प्रति यूनिट मिलने वाले अनाज में कटौती की जाती है। गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि वे पूरी तरह इस योजना पर निर्भर हैं।

सरकारी मशीन की जगह ‘सेटिंग’ वाली मशीन का इस्तेमाल

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि राशन तौलने के लिए सरकार द्वारा दी गई इलेक्ट्रॉनिक वेट मशीन का उपयोग नहीं किया जा रहा है। इसके बजाय दूसरी मशीन से तौल किया जाता है, जिसके बारे में ग्रामीणों का आरोप है कि उसमें पहले से सेटिंग की गई है, जिससे हर बार कम वजन दिखाया जाता है। यह सीधे तौर पर लाभार्थियों के अधिकारों का हनन है।

पारदर्शिता और नियमों की अनदेखी

पीडीएस व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कई नियम बनाए गए हैं—जैसे वितरण के समय सूची का प्रदर्शन, ई-पॉस मशीन से सत्यापन, सही तौल, और कोटेदार की उपस्थिति। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इन सभी नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग

लगातार हो रही अनियमितताओं से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि राशन वितरण प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

प्रशासन की भूमिका पर निगाहें

अब सभी की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते इस मामले में सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। जरूरत इस बात की है कि जांच निष्पक्ष हो और पात्र लाभार्थियों को उनका पूरा अधिकार सुनिश्चित किया जाए।

राजापुर का यह मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पीडीएस सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह गरीबों के हक पर सीधा प्रहार है। ऐसे में प्रशासन को त्वरित और कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि व्यवस्था में विश्वास बहाल हो सके।

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