पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना को निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने व्यापक तैयारियां की हैं। आयोग ने मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए 165 अतिरिक्त मतगणना पर्यवेक्षक तथा 77 पुलिस पर्यवेक्षक तैनात किए हैं।
इन अधिकारियों की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतगणना पूरी तरह शांतिपूर्ण, भयमुक्त और पारदर्शी वातावरण में संपन्न हो। आयोग ने यह कदम संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत प्राप्त अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए उठाया है।
जहां-जहां एक विधानसभा क्षेत्र में एक से अधिक मतगणना कक्ष बनाए गए हैं, वहां मुख्य पर्यवेक्षकों की सहायता के लिए अतिरिक्त पर्यवेक्षकों को लगाया गया है। वहीं, पुलिस पर्यवेक्षक मतगणना केंद्रों के बाहर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर कड़ी नजर रखेंगे। हालांकि, उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी स्थिति में मतगणना कक्ष के अंदर प्रवेश नहीं करेंगे।
मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग ने आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया है। सभी मतगणना कर्मियों, उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों के लिए क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान पत्र जारी किए जाएंगे, जिनके आधार पर ही केंद्रों में प्रवेश मिलेगा।
इसके अलावा, सख्त दिशा-निर्देश जारी करते हुए यह भी कहा गया है कि मतगणना कक्ष के अंदर केवल अधिकृत अधिकारी ही मोबाइल फोन ले जा सकेंगे। अन्य किसी को इसकी अनुमति नहीं होगी।
मतगणना के दौरान हर चरण में सटीकता सुनिश्चित करने के लिए माइक्रो-ऑब्जर्वर तैनात किए गए हैं, जो स्वतंत्र रूप से परिणामों को नोट करेंगे और उनकी क्रॉस-जांच की जाएगी। वहीं, परिणामों से संबंधित फॉर्म 17सी-II को गणना एजेंटों की उपस्थिति में तैयार कर हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
चुनाव आयोग के इन कदमों से यह साफ है कि वह मतगणना प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।
