
भारत की अगुवाई में 6–7 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम में आयोजित दूसरी BRICS रोजगार कार्य समूह बैठक वैश्विक श्रम ढांचे को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर प्रदान करती है। यह आयोजन केवल नीतिगत संवाद नहीं, बल्कि श्रमिकों के भविष्य को अधिक सुरक्षित, समावेशी और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक ठोस पहल है।
✦ बैठक का मूल उद्देश्य
इस बैठक का केंद्रबिंदु उन चुनौतियों का समाधान खोजना है, जो आज के बदलते रोजगार परिदृश्य में उभर रही हैं। सदस्य देश मिलकर ऐसे मॉडल तैयार करने का प्रयास करेंगे, जो श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा और अवसर प्रदान करें।
▸ सामाजिक सुरक्षा की नई परिभाषा
तेजी से बढ़ती गिग और असंगठित अर्थव्यवस्था ने पारंपरिक सामाजिक सुरक्षा ढांचे को चुनौती दी है। ऐसे में डिजिटल और पोर्टेबल सिस्टम विकसित करना आवश्यक है, ताकि श्रमिक स्थान या नौकरी बदलने पर भी अपने अधिकारों और लाभों से जुड़े रहें।
▸ महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि
आर्थिक विकास को गति देने के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। इस बैठक में कार्यस्थल पर समान अवसर, सुरक्षित वातावरण और नेतृत्व में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
▸ कौशल विकास और रोजगार का भविष्य
नई तकनीकों के आगमन से रोजगार के स्वरूप में तेजी से बदलाव आ रहा है। इसलिए कौशल मानचित्रण के माध्यम से यह पहचानना जरूरी है कि आने वाले समय में किन क्षमताओं की आवश्यकता होगी और प्रशिक्षण तंत्र को कैसे मजबूत किया जाए।
▸ डिजिटल समाधान का विस्तार
डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से श्रमिकों का पंजीकरण, लाभ वितरण और प्रशिक्षण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जा सकता है। इससे विशेष रूप से गिग और प्लेटफ़ॉर्म आधारित श्रमिकों को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।
🌍 वैश्विक सहभागिता और सहयोग
इस मंच पर BRICS के सदस्य देशों—ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—के साथ नए साझेदार राष्ट्र भी अपनी भागीदारी दर्ज करा रहे हैं। इसके अलावा International Labour Organization और International Social Security Association जैसे संस्थान विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
यह बहुपक्षीय सहयोग श्रम नीतियों में वैश्विक समन्वय और साझा प्रगति की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
🇮🇳 भारत की रणनीतिक भूमिका
भारत इस आयोजन के माध्यम से खुद को एक जिम्मेदार और दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित कर रहा है। देश का फोकस श्रमिकों के लिए तकनीक-संचालित सेवाओं को बढ़ावा देना और सामाजिक सुरक्षा को अधिक व्यापक बनाना है।
मार्च 2026 में हुई प्रारंभिक वर्चुअल बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा शुरू हुई थी, अब उन्हें ठोस कार्ययोजना में बदलने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट है—ऐसी श्रम व्यवस्था का निर्माण, जो विकास के साथ-साथ समानता और सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।
📊 संभावित प्रभाव
- श्रमिकों के लिए: अधिक सुरक्षित और लचीला रोजगार ढांचा
- महिलाओं के लिए: कार्यक्षेत्र में बढ़ती भागीदारी और सशक्तिकरण
- अर्थव्यवस्था के लिए: कौशल आधारित विकास और उत्पादकता में वृद्धि
- डिजिटल समावेशन: पारदर्शिता, दक्षता और पहुंच में सुधार
✦ निष्कर्ष
तिरुवनंतपुरम में होने वाली यह बैठक भविष्य के श्रम बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। भारत के नेतृत्व में यह पहल न केवल सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करेगी, बल्कि एक ऐसे वैश्विक श्रम ढांचे की नींव रखेगी, जो न्यायसंगत, समावेशी और टिकाऊ हो।
