भारत निर्वाचन आयोग द्वारा वर्ष 2026 में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में आयोजित विधानसभा आम चुनावों तथा पांच राज्यों की सात विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया गया। चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और भयमुक्त बनाने के उद्देश्य से आयोग ने सुरक्षा एजेंसियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर व्यापक कार्रवाई की।
निर्वाचन आयोग की सतर्क निगरानी और लगातार चलाए गए विशेष अभियानों के परिणामस्वरूप चुनाव अवधि के दौरान 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, अवैध शराब, नशीले पदार्थ तथा अन्य प्रलोभन सामग्री जब्त की गई। यह कार्रवाई चुनावों में धनबल और बाहुबल के प्रभाव को रोकने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
चुनाव आयोग ने बताया कि विभिन्न राज्यों में उड़नदस्तों, निगरानी टीमों, स्थैतिक निगरानी दलों तथा पुलिस बलों को सक्रिय रखते हुए चौबीसों घंटे निगरानी की गई। सीमावर्ती क्षेत्रों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और संवेदनशील इलाकों में विशेष चेकिंग अभियान चलाए गए ताकि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
आयोग के अनुसार आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद प्रशासन ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की गतिविधियों पर भी करीबी नजर रखी। मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से बांटी जाने वाली नकदी, शराब और नशीले पदार्थों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की गई। इस दौरान कई स्थानों पर बड़ी मात्रा में अवैध सामग्री बरामद होने के साथ अनेक लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई।
निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल के 144-फलता विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अब आदर्श आचार संहिता समाप्त हो चुकी है। हालांकि आयोग ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए भविष्य में भी इसी प्रकार की सख्त निगरानी जारी रहेगी।
लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा उठाए गए ये कदम निष्पक्ष चुनाव कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। आयोग की इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि चुनावों में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या मतदाताओं को प्रभावित करने के प्रयासों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
