तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में तकनीकी नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और जटिल कौशल की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में यह समझना आवश्यक हो गया है कि किसी देश की अर्थव्यवस्था में ज्ञान, अनुसंधान, बौद्धिक संपदा, पारंपरिक ज्ञान और नवाचार का वास्तविक योगदान कितना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय एक ऐसी रूपरेखा विकसित कर रहा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्ञान आधारित संसाधनों के महत्व का व्यवस्थित आकलन कर सके।
इस दिशा में फरवरी 2025 में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के बाद एक तकनीकी सलाहकार समूह (TAG) का गठन किया गया। इस समूह की अध्यक्षता उस समय क्षमता विकास आयोग के सदस्य रहे ने की। समूह में नीति विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों, शिक्षाविदों और विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया, ताकि एक व्यापक और व्यावहारिक ढांचा तैयार किया जा सके।
सितंबर 2025 में आयोजित विचार-विमर्श कार्यशाला में विशेषज्ञों ने ज्ञान आधारित संसाधनों के वर्गीकरण, उनके आर्थिक प्रभाव और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान को मापने के संभावित तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। इसी प्रक्रिया के आधार पर मंत्रालय ने एक विस्तृत आधार पत्र तैयार किया है, जिसमें ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण किया गया है।
इस शोधपत्र को चार प्रमुख अध्यायों में विभाजित किया गया है। पहले अध्याय में ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की अवधारणा, उसके विकास और अर्थव्यवस्था पर उसके प्रभाव को समझाया गया है। दूसरे अध्याय में अनुसंधान एवं विकास, बौद्धिक संपदा अधिकार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और अकादमिक संसाधनों के मूल्यांकन की विभिन्न पद्धतियों का विवरण दिया गया है। तीसरे अध्याय में भारत के पारंपरिक ज्ञान, उसकी सांस्कृतिक एवं आर्थिक भूमिका, संरक्षण और दस्तावेजीकरण की चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया है। वहीं चौथे अध्याय में अर्थव्यवस्था पर ज्ञान के प्रभाव को समझने के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।
मंत्रालय ने इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य सचिव की अध्यक्षता में “ज्ञान प्रणाली समिति” का भी गठन किया है। इस समिति को एक व्यावहारिक नीति दस्तावेज तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो भविष्य की आर्थिक नीतियों और विकास योजनाओं का आधार बनेगा।
सरकार का मानना है कि ज्ञान आधारित संसाधनों का सही मूल्यांकन भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अधिक मजबूत बनाएगा। इससे शिक्षा, अनुसंधान, स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक और पारंपरिक ज्ञान क्षेत्रों में निवेश एवं नीति निर्माण को नई दिशा मिलेगी। विशेष रूप से “विकसित भारत” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों को गति देने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पर यह आधार पत्र उपलब्ध कराया गया है। मंत्रालय ने सभी हितधारकों और आम नागरिकों से 15 जून 2026 तक सुझाव भेजने का आग्रह किया है। सुझाव ईमेल के माध्यम से भेजे जा सकते हैं, जिससे इस रूपरेखा को अंतिम रूप देने में सहायता मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस पहल को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो भारत भविष्य में केवल विनिर्माण आधारित अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि ज्ञान और नवाचार आधारित वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकेगा।
