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भारत-नीदरलैंड संबंधों को नई रणनीतिक ऊंचाई देते हुए प्रधानमंत्री श्री की 16-17 मई 2026 की नीदरलैंड यात्रा ऐतिहासिक साबित हुई। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर हुई इस आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। यह यात्रा केवल कूटनीतिक मुलाकात तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापार, रक्षा, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, जल प्रबंधन, शिक्षा, ऊर्जा और वैश्विक शांति जैसे अनेक क्षेत्रों में सहयोग के नए अध्याय खोलने वाली साबित हुई।

हेग स्थित रॉयल पैलेस हुइस टेन बॉश में नीदरलैंड के राजा और महारानी मैक्सिमा ने प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया। इसके बाद दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई, जिसमें भारत और नीदरलैंड के बीच सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र, मानवाधिकार, नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय शांति जैसे साझा मूल्यों ने दोनों देशों को और करीब लाने का कार्य किया है।

सांकेतिक तस्वीर

वार्ता के दौरान भारत और नीदरलैंड ने रणनीतिक साझेदारी रोडमैप को अपनाया, जिसके अंतर्गत रक्षा, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम तकनीक, अंतरिक्ष, जलवायु परिवर्तन, हरित ऊर्जा, जल प्रबंधन, शिक्षा और समुद्री विकास सहित कई क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर और उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश, अनुसंधान और प्रतिभा विकास के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में हुई प्रगति का भी स्वागत किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री जेटन ने वैश्विक चुनौतियों पर भी गंभीर चर्चा की। दोनों नेताओं ने यूक्रेन युद्ध पर चिंता जताते हुए संवाद और कूटनीति के माध्यम से स्थायी शांति का समर्थन किया। पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई और होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध व्यापार और नौवहन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र, सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

आर्थिक क्षेत्र में दोनों देशों ने व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए सीमा शुल्क सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए। नीदरलैंड को भारत के लिए यूरोप का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बताते हुए दोनों नेताओं ने लॉजिस्टिक्स, स्मार्ट शहर, सतत कृषि और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को नई गति देने की बात कही। स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने डिजिटल सहयोग, तकनीकी मिशनों और युवा उद्यमियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का निर्णय लिया।

रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण रहा। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को मजबूत करने, संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण और रक्षा उद्योगों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। साइबर सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई पर भी सहमति बनी। प्रधानमंत्री जेटन ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हुए भारत के प्रति नीदरलैंड के पूर्ण समर्थन की घोषणा की। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के प्रति “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने और आतंकवादियों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।

शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण समझौते हुए। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और नीदरलैंड के विश्वविद्यालयों के बीच सेमीकंडक्टर, जल प्रबंधन और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने के लिए नए कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। अंतरिक्ष तकनीक, जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं में भी दोनों देशों ने संयुक्त कार्य करने का निर्णय लिया।

ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में हरित हाइड्रोजन, जैव ईंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था पर सहयोग को नई दिशा दी गई। भारत-नीदरलैंड हरित हाइड्रोजन रोडमैप लॉन्च किया गया, जो स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत करेगा। इसके साथ ही जल प्रबंधन और नमामि गंगे मिशन में डच विशेषज्ञता के उपयोग पर भी चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और नीदरलैंड के बीच बढ़ते विश्वास, साझा हितों और वैश्विक सहयोग की मजबूत मिसाल बनकर उभरी है। रणनीतिक साझेदारी की घोषणा ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा दी है और आने वाले समय में व्यापार, तकनीक, सुरक्षा तथा वैश्विक विकास के क्षेत्रों में यह सहयोग और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

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