
अमृत पाल बहराइच
रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़
बहराइच: नेपाल के धनगढी क्षेत्र में हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद बहराइच के सुजौली थाना क्षेत्र का गुप्तापुरवा (बड़खड़िया) गांव शोक में डूबा हुआ है। रोजगार की तलाश में नेपाल गए गांव के तीन युवकों के साथ हुई इस त्रासदी ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। हादसे में दो युवकों की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया।
बताया जा रहा है कि घाघरा नदी के कटान से प्रभावित परिवारों के ये युवक बेहतर रोज़गार की उम्मीद में नेपाल के एक ईंट-भट्ठे पर काम करने गए थे। वहीं भट्ठे के पास बनी झोपड़ी में देर रात एक तेज रफ्तार और अनियंत्रित पानी का टैंकर घुस गया। हादसा इतना भीषण था कि 21 वर्षीय अजय और 9 वर्षीय पवन की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 18 वर्षीय धीरू गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल युवक का इलाज जारी है।
इस हृदयविदारक घटना के बाद समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवारों से मिलने गांव पहुंचा। सपा अध्यक्ष के निर्देश पर पीड़ित परिवारों को ₹50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। सहायता राशि का चेक सपा नेता ने परिवारों को सौंपा।
गांव में मातम का माहौल था। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। इस दौरान यासिर शाह ने परिवारों को सांत्वना देते हुए कहा कि पार्टी इस कठिन समय में उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि जिन बच्चों को परिवार ने खोया है, उनकी कमी कभी पूरी नहीं की जा सकती, लेकिन यह सहायता पीड़ितों के दुख को कुछ हद तक कम करने का एक प्रयास है।
उन्होंने अपने संघर्षपूर्ण जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि गरीब और मजदूर परिवारों का दर्द वही समझ सकता है जिसने कठिन परिस्थितियों को करीब से देखा हो। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समाजवादी पार्टी हमेशा जरूरतमंद और बेसहारा लोगों की आवाज़ बनकर खड़ी रहेगी।
इस मौके पर जिला अध्यक्ष राम हर्ष यादव, शाइस्ता परवीन, पूर्व विधायक रमेश गौतम, पूर्व मंत्री बंशीधर बौद्ध, जयंकर सिंह, सावित्री बाई फुले, रेखा राव, ललिता हरेंद्र पासवान, अमृतपाल सिंह, जसबीर सिंह, मो. आजाद समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे।
नेपाल हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रोज़गार की तलाश में पलायन करने वाले गरीब परिवार कितने असुरक्षित हालात में जीवन बिताने को मजबूर हैं। गांव के लोगों का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर रोजगार और सुरक्षित आवास की बेहतर व्यवस्था होती, तो शायद इन परिवारों को इतनी बड़ी त्रासदी का सामना नहीं करना पड़ता।
