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ब्रिटेन के 2030 तक बिजली तंत्र के डीकार्बनाइजेशन के लक्ष्य को लेकर गंभीर चुनौतियां: नेशनल एनर्जी सिस्टम ऑपरेटर

सांकेतिक तस्वीर

ब्रिटेन का 2030 तक अपने बिजली तंत्र को पूरी तरह डीकार्बनाइज करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसे हासिल करने के लिए तत्काल और व्यापक सुधार की आवश्यकता है। देश के नेशनल एनर्जी सिस्टम ऑपरेटर (NESO) की ओर से मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि यह लक्ष्य ब्रिटेन के व्यापक जलवायु लक्ष्यों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसे प्राप्त करने के लिए जीवाश्म ईंधनों से तेजी से हटकर पवन और सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों पर निर्भरता बढ़ानी होगी।

यह 2030 का लक्ष्य ब्रिटेन को स्वच्छ ऊर्जा में अग्रणी बनाने और 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लिए प्रतिबद्धता के तहत रखा गया है। हालांकि, NESO ने चेतावनी दी है कि वर्तमान बुनियादी ढांचे और नियामक ढांचे को नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती मांग को संभालने के लिए बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण की आवश्यकता है। इसमें ग्रिड टेक्नोलॉजी को उन्नत करना, ऊर्जा भंडारण क्षमता को बढ़ाना और नवीकरणीय परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए नीतिगत प्रक्रियाओं को सरल बनाना शामिल है।

ब्रिटेन ने पहले ही नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिससे उसकी बिजली उत्पादन में इनका बड़ा योगदान हो चुका है। हालांकि, NESO की रिपोर्ट का कहना है कि अगर तेजी से कदम नहीं उठाए गए, तो इस बदलाव की गति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपर्याप्त हो सकती है। इसके लिए न केवल तकनीकी सुधारों की आवश्यकता है, बल्कि ऐसी नीतियों की भी जरूरत है जो स्वच्छ ऊर्जा में निवेश को प्रोत्साहित करें और जीवाश्म ईंधनों से पारंपरिक निर्भरता को खत्म करने में जनसमर्थन जुटाएं।

इन चुनौतियों का सामना करते हुए, ब्रिटेन सरकार और NESO अगले दशक में देश के डीकार्बनाइजेशन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एक मजबूत बिजली तंत्र तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा की मांग को सुरक्षित रूप से पूरा किया जा सके।

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