
यरूशलेम/बेरुत | 31 मई, 2026
मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक ऐसे चरण में पहुँच गया है जिसे क्षेत्रीय युद्ध के सबसे खतरनाक विस्तारों में से एक माना जा रहा है। इज़राइली रक्षा बलों (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में अपनी जमीनी कार्रवाई को तेज करते हुए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लितानी नदी के उत्तर तक सैन्य दबाव बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार यह पिछले 26 वर्षों में लेबनानी क्षेत्र के भीतर इज़राइल की सबसे गहरी सैन्य प्रगति मानी जा रही है।
लितानी नदी के पार पहुँचे टैंक, बदला युद्ध का समीकरण
सैन्य सूत्रों के अनुसार इज़राइली बख्तरबंद इकाइयों और विशेष बलों ने लितानी नदी के आसपास कई रणनीतिक क्षेत्रों में अभियान चलाया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी पुष्टि की है कि इज़राइली सैनिक अब केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दक्षिणी लेबनान के अंदर गहराई तक सक्रिय अभियान चला रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लितानी नदी केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं बल्कि दशकों से इज़राइल और हिजबुल्लाह के बीच सैन्य संतुलन का प्रतीक रही है। ऐसे में इस क्षेत्र के पार इज़राइली सैन्य उपस्थिति पूरे संघर्ष के स्वरूप को बदल सकती है।
ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा बना प्रतीकात्मक जीत
संघर्ष के बीच इज़राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान स्थित ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट किले (Beaufort Castle) पर नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया है। पहाड़ी पर स्थित यह किला पूरे क्षेत्र की निगरानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार यह केवल सैन्य उपलब्धि नहीं बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी है कि इज़राइल अब सीमित जवाबी कार्रवाई से आगे बढ़ चुका है।
हिजबुल्लाह का जवाब, सीमावर्ती क्षेत्रों में भीषण लड़ाई
दूसरी ओर हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसके लड़ाके इज़राइली सेना को भारी नुकसान पहुँचा रहे हैं। संगठन ने कई क्षेत्रों में एंटी-टैंक मिसाइलों, ड्रोन और रॉकेट हमलों के जरिए जवाबी कार्रवाई करने की बात कही है।
सीमावर्ती गाँवों और पहाड़ी इलाकों में दोनों पक्षों के बीच लगातार संघर्ष जारी है। कई इलाकों से विस्फोटों, हवाई हमलों और भारी गोलाबारी की खबरें सामने आई हैं।
लाखों नागरिकों पर संकट
युद्ध के विस्तार का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। लेबनान के दक्षिणी हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि विस्थापित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई अस्पताल अपनी क्षमता से अधिक दबाव झेल रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो मानवीय संकट और गंभीर रूप ले सकता है।
युद्धविराम के बावजूद जारी हैं हमले
दिलचस्प बात यह है कि अप्रैल में घोषित युद्धविराम और अमेरिका समर्थित कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच हिंसा पूरी तरह नहीं रुकी। सीमा पार रॉकेट हमले, ड्रोन गतिविधियाँ और हवाई हमले लगातार जारी रहे, जिसके कारण हालात फिर से विस्फोटक बन गए हैं।
अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र की बढ़ी चिंता
संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल युद्धविराम की अपील करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता व्यक्त की है। वहीं अमेरिका लगातार कूटनीतिक बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। वॉशिंगटन में इज़राइल और लेबनान से जुड़े सुरक्षा वार्ताओं का दौर भी जारी है।
हालांकि जमीन पर जारी सैन्य गतिविधियाँ संकेत दे रही हैं कि राजनीतिक समाधान अभी भी दूर दिखाई दे रहा है।
क्या लंबा चलेगा यह युद्ध?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इज़राइली सेना लितानी नदी के उत्तर में अपनी स्थिति मजबूत करती है और हिजबुल्लाह जवाबी हमले जारी रखता है, तो यह संघर्ष आने वाले महीनों तक खिंच सकता है।
कई विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यह केवल सीमा सुरक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय प्रभाव की लड़ाई में बदलता जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिन न केवल इज़राइल और लेबनान बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
