
नई दिल्ली, 1 जून 2026।
देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच राहत की उम्मीदें बढ़ गई हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ते हुए केरल तट के निकट पहुंच चुका है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों के भीतर मानसून केरल में प्रवेश कर सकता है, जिसके साथ ही देश के वार्षिक वर्षा चक्र की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी।
तटीय इलाकों में बढ़ी बारिश की गतिविधियां
केरल के विभिन्न तटीय जिलों और लक्षद्वीप क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों के दौरान बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई स्थानों पर तेज हवाओं के साथ वर्षा होने से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। वहीं पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भी प्री-मानसून बारिश का दौर जारी है, जिससे मौसम सुहावना बना हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार समुद्री परिस्थितियां मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल बनी हुई हैं और अगले 48 से 72 घंटों के दौरान इसके और सक्रिय होने की संभावना है।
अल नीनो की स्थिति बढ़ा रही चिंता
जहां एक ओर मानसून के आगमन से राहत की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर अल नीनो की संभावित स्थिति मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो परिस्थितियां आगामी महीनों में मानसूनी वर्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
माना जा रहा है कि जुलाई और अगस्त के दौरान अल नीनो का प्रभाव अधिक दिखाई दे सकता है, जिसके कारण देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज होने की आशंका बनी हुई है।
किन क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर?
मौसम मॉडल्स के शुरुआती संकेत बताते हैं कि उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में वर्षा का वितरण असमान रह सकता है। कुछ इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई गई है। ऐसे क्षेत्रों में जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
हालांकि पूर्वोत्तर भारत में सामान्य या उससे बेहतर वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है, जिससे वहां के किसानों को लाभ मिल सकता है।
कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है मानसून
भारत की कृषि व्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है। धान, मक्का, दालें और तिलहन जैसी खरीफ फसलों की बुवाई मानसून की स्थिति के अनुसार तय होती है। इसके अलावा देश के जलाशयों, बांधों और भूजल स्तर को बनाए रखने में भी मानसून की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती चरण में पर्याप्त बारिश होती है तो किसानों को बुवाई कार्य में आसानी होगी और कृषि उत्पादन को मजबूती मिलेगी।
आगे की क्या है संभावना?
मौसम विभाग के अनुसार केरल में प्रवेश करने के बाद मानसून धीरे-धीरे कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ेगा। इसके बाद जून के दूसरे और तीसरे सप्ताह में मध्य भारत तथा पूर्वी राज्यों तक इसके पहुंचने की संभावना है।
देशभर के लोग अब मानसून की पहली आधिकारिक दस्तक का इंतजार कर रहे हैं। तपती गर्मी के बीच मानसून न केवल मौसम में राहत लेकर आएगा, बल्कि किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए भी नई उम्मीदों का संदेश देगा।
