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‘खेत बचाओ अभियान’ में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का किसानों से आह्वान, मोटे अनाजों के संरक्षण पर दिया जोर

सांकेतिक तस्वीर

उत्तराखंड के कालाढूंगी क्षेत्र में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने किसानों से पारंपरिक कृषि पद्धतियों को अपनाने और मोटे अनाजों के संरक्षण को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के बीच मोटे अनाज न केवल किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं, बल्कि देश की पोषण सुरक्षा को भी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विशेष रूप से मंडुवा, झंगोरा, चौलाई और अन्य पारंपरिक फसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये फसलें उत्तराखंड की कृषि विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। वर्षों से पहाड़ी क्षेत्रों में इनका उत्पादन किसानों की आजीविका का आधार रहा है, लेकिन आधुनिक खेती और व्यावसायिक फसलों की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण इनका क्षेत्रफल लगातार घटता गया। उन्होंने किसानों से इन फसलों की खेती को पुनर्जीवित करने और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी परंपरा को पहुंचाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि मोटे अनाजों की खेती कम पानी में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है और यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अपेक्षाकृत अधिक सहनशील होती है। यही कारण है कि आज पूरी दुनिया में मिलेट्स और पारंपरिक अनाजों की मांग तेजी से बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने किसानों को इस अवसर का लाभ उठाने और बाजार की बढ़ती मांग के अनुरूप उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कृषि जैव विविधता के संरक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका कहना था कि पारंपरिक फसलें केवल खाद्यान्न का स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे स्थानीय पारिस्थितिकी, मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। यदि इन फसलों का संरक्षण किया जाता है, तो यह कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज, विपणन सुविधाएं और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों का विकास आवश्यक है। मोटे अनाजों की खेती को बढ़ावा देकर किसानों को बेहतर आर्थिक अवसर प्रदान किए जा सकते हैं। इसके साथ ही स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित किसानों और कृषि विशेषज्ञों ने भी पारंपरिक फसलों के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि यदि किसानों को उचित प्रोत्साहन और बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ाकर न केवल उनकी आय में सुधार किया जा सकता है, बल्कि लोगों को पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध कराया जा सकता है।

‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से राज्य में कृषि भूमि के संरक्षण, पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को जागरूक करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियों के प्रति प्रेरित करना था जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी लाभदायक हों। मुख्यमंत्री के इस आह्वान को किसानों ने सकारात्मक पहल बताते हुए पारंपरिक फसलों के संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने के संकल्प के रूप में देखा।

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