
अमेरिका के राष्ट्रपति-निर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप को एक ऐसे समय में चीन के साथ अपने संबंधों को संभालने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा जब जो बाइडन और शी जिनपिंग के बीच पिछले एक साल में संबंधों को एक नए दिशा में पुनः स्थापित किया गया है। कोविड-19 महामारी और ताइवान को लेकर बढ़ी हुई तनातनी के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में एक कूटनीतिक मंदी देखी गई थी, लेकिन बाइडन और जिनपिंग ने मिलकर इसे सुधारने का प्रयास किया।
हालांकि, अब जब ट्रंप फिर से व्हाइट हाउस में लौटने वाले हैं, तो कई राजनयिकों और विश्लेषकों का मानना है कि ये महत्वपूर्ण कूटनीतिक चैनल्स जो इन संबंधों को बेहतर बनाने में सहायक रहे हैं, उन्हें फिर से खतरा हो सकता है। इनमें कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिन पर बातचीत चल रही है:
1. ताइवान संकट: ताइवान को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव जारी है। ट्रंप प्रशासन के दौरान चीन ने ताइवान के मुद्दे को लेकर कड़ा रुख अपनाया था, और ट्रंप के वापसी के बाद एक बार फिर से इस मुद्दे में उथल-पुथल की संभावना जताई जा रही है।
2. व्यापार युद्ध: ट्रंप के पहले कार्यकाल में व्यापार युद्ध ने दोनों देशों के बीच मतभेदों को बढ़ाया था। बाइडन के प्रशासन ने इस दिशा में कुछ सुधार किए थे, लेकिन अब ट्रंप के वापसी से यह देखने वाली बात होगी कि वह इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं।
3. सुरक्षा और प्रौद्योगिकी: चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर अमेरिका और चीन के बीच सुरक्षा और प्रौद्योगिकी को लेकर भी निरंतर चर्चा होती रहती है। यह क्षेत्र भी ट्रंप के शासन में तनावपूर्ण रहा था और उनका रुख इस पर निर्णायक हो सकता है।
4. पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन: बाइडन प्रशासन ने चीन के साथ जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सहयोग बढ़ाया था, लेकिन ट्रंप के रुख में बदलाव संभव है, क्योंकि वह पहले इसे एक वैश्विक चिंता के बजाय एक व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के रूप में देख सकते हैं।
इस स्थिति में, डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में यू.एस.-चीन संबंधों के भविष्य को लेकर कई अज्ञात तत्व हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप ने कूटनीतिक चैनल्स को बंद किया, तो इससे दोनों देशों के रिश्तों में और अधिक तनाव पैदा हो सकता है। वहीं, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि ट्रंप एक कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी रणनीति के तहत चीन से मुकाबला कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच एक नई प्रतिस्पर्धा का दौर शुरू हो सकता है।
समाप्ति में, यह कहना मुश्किल है कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद यू.एस.-चीन संबंधों में क्या बदलाव आएगा, लेकिन यह निश्चित है कि उनके निर्णय वैश्विक कूटनीति को प्रभावित करेंगे।