
चित्रकूट। जनपद चित्रकूट के मऊ नगर पंचायत क्षेत्र में एक परिवार ने कुछ कथित दबंगों और भू-माफियाओं पर उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से न्याय की मांग की है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उनकी पैतृक भूमि पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है, जिसके चलते वे लगातार अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
पीड़ित परिवार के अनुसार मऊ नगर पंचायत स्थित गाटा संख्या 416 एवं लगभग 0.7210 हेक्टेयर रकबे की भूमि पर कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। आरोप है कि 11 जून 2026 को कुछ व्यक्तियों ने जमीन पर मिट्टी डलवाकर उसे भरने का कार्य शुरू कर दिया, जिससे भूमि पर अपना अधिकार स्थापित किया जा सके।
परिवार का कहना है कि उन्होंने इस मामले की जानकारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दी है और कई बार शिकायतें भी दर्ज कराई हैं। इसके बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ितों का आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें दबाव में लेने और डराने-धमकाने की कोशिश भी की गई।
पीड़ित पक्ष ने कुछ स्थानीय व्यक्तियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में काम कर रहे हैं और अपनी राजनीतिक तथा सामाजिक पहुंच का इस्तेमाल करके जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। परिवार का कहना है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उनके पिता का भी निधन हो चुका है, जिसके कारण वे स्वयं को असहाय महसूस कर रहे हैं।
मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए भूमि की पैमाइश कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा कथित अवैध कब्जे को तत्काल हटाने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की अपील भी की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई तो भू-माफियाओं के हौसले और बढ़ सकते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भूमि विवादों का निष्पक्ष समाधान किया जाए और कमजोर वर्ग के लोगों की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल यह मामला प्रशासन के संज्ञान में है। जांच के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा और उनकी भूमि को किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाएगा।
(नोट: यह समाचार पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि संबंधित प्रशासनिक जांच के बाद ही संभव होगी।)
