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भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा: डॉलर की मजबूती और बैंक की बिक्री के बीच स्थिरता

गुरुवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। रुपये ने 84.40 के स्तर पर बंद होकर एक नया रिकॉर्ड बनाया, जो पिछले सत्र में 84.38 के स्तर से मामूली गिरावट दर्शाता है। हालांकि, रुपया सप्ताह दर सप्ताह लगभग स्थिर बना रहा, क्योंकि सरकारी बैंकों ने डॉलर की बिक्री कर रुपये को और गिरने से बचाने का प्रयास किया।

रुपये की गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती और भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी रही। इसके बावजूद, क्षेत्रीय मुद्राओं के मुकाबले रुपये का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। कई एशियाई मुद्राओं में गिरावट देखी गई, जबकि रुपये को सरकारी बैंकों के हस्तक्षेप का लाभ मिला।

विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव बना हुआ है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत रुख और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी से डॉलर की मांग और बढ़ने की संभावना है, जिससे रुपये पर और दबाव आ सकता है।

इस मौजूदा स्थिति में, भारतीय रिजर्व बैंक और सरकारी बैंकों की नीतियां अहम भूमिका निभा सकती हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि डॉलर की मांग इसी तरह जारी रहती है, तो भारतीय मुद्रा को समर्थन देने के लिए आरबीआई को और सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता पड़ सकती है।

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