
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024 की पहली छमाही (H1) में ऑटो कंपोनेंट आफ्टरमार्केट में 5% की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि मुख्य रूप से इस्तेमाल किए गए वाहनों की संख्या में वृद्धि और मरम्मत व रखरखाव बाजार के औपचारिक होने के कारण हुई है।
5.5 अरब डॉलर से 5.7 अरब डॉलर तक का इजाफा
आफ्टरमार्केट का मूल्य वित्तीय वर्ष 2024 की पहली छमाही में ₹45,158 करोड़ (5.5 अरब डॉलर) था, जो एक साल में बढ़कर ₹47,416 करोड़ (5.7 अरब डॉलर) हो गया। इस वृद्धि ने भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग की मजबूती को दर्शाया है।
पिछले दशक में मजबूत विकास
ACMA ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में ऑटो कंपोनेंट उद्योग में घरेलू वाहनों की मजबूत बिक्री, निर्यात में वृद्धि और आफ्टरमार्केट के विस्तार के कारण उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
आफ्टरमार्केट का महत्व
आफ्टरमार्केट वह माध्यम है जो वाहनों के बिक्री के बाद उनकी पार्ट्स, एक्सेसरीज़ और सेवाओं से संबंधित है। यह बाजार वाहन निर्माताओं (OEMs) द्वारा बेचे गए वाहनों के लिए दूसरी श्रेणी का बाजार बनाता है।
OEM को आपूर्ति में 11.2% की वृद्धि
ACMA की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 की पहली छमाही (H1) में ऑटो कंपोनेंट की आपूर्ति वाहन निर्माताओं (OEMs) को ₹2.83 लाख करोड़ तक पहुंच गई। यह पिछले वर्ष की तुलना में 11.2% की वृद्धि है।
मरम्मत और रखरखाव बाजार का औपचारिकरण
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मरम्मत और रखरखाव बाजार का औपचारिक रूप से विकसित होना, छोटे और असंगठित कार्यशालाओं से बड़े, संगठित केंद्रों की ओर बढ़ने का संकेत है। यह न केवल उपभोक्ताओं के लिए बेहतर सेवाएं सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि उद्योग की समग्र वृद्धि में भी योगदान दे रहा है।
निष्कर्ष
ऑटो कंपोनेंट आफ्टरमार्केट में हुई यह वृद्धि भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग की संभावनाओं को और अधिक मजबूत करती है। इस्तेमाल किए गए वाहनों की बढ़ती संख्या और मरम्मत बाजार में सुधार के साथ, आने वाले वर्षों में यह उद्योग और अधिक गति पकड़ सकता है।